नगर कोतवाली में पुलिस की गिरफ्त में जमीन घोटाले का आरोपी सब रजिस्ट्रार सौरभ सिंह। -संवाद
गोंडा। जिले में भूमि घोटाले के मास्टरमाइंड के साथ मिलकर फर्जी बैनामे व वसीयत तैयार करने वाला प्रभारी सब रजिस्ट्रार सौरभ सिंह आखिरकार एसआईटी की गिरफ्त में आ ही गया। सदर तहसील के उपनिबंधक कार्यालय में प्रभारी सब रजिस्ट्रार पद पर रहते उसने कई फर्जी बैनामे और जाली वसीयत तैयार की थीं। मामले का खुलासा होने पर विभाग ने सौरभ को निलंबित कर दिया था। एसपी आकाश तोमर ने बताया कि निलंबित सब रजिस्ट्रार सौरभ सिंह के विरुद्ध 22 मुकदमे दर्ज हैं। उसे कोर्ट में पेश करके जेल भेजा गया है।
मनकापुर के धुसवा गांव निवासी सौरभ सिंह वर्ष 2019 में उपनिबंधक कार्यालय सदर में प्रभारी उपनिबंधक पद पर तैनात था। साल 2022 में फर्जी वसीयत करने के मामले में सौरभ को निलंबित किया गया था। इसके बाद सौरभ के कई अन्य कारनामे उजागर हुए थे। फिर भूमि बैनामा घोटाले की जांच में भी कई मामले उजागर होने पर सौरभ सिंह के खिलाफ 22 मुकदमे दर्ज हो गए।
पुलिस का कहना है कि भूमि घोटाले के मास्टरमाइंड बृजेश कुमार अवस्थी से सौरभ सिंह की मिलीभगत थी। वह जबरन बैनामा रजिस्ट्रेशन की कार्यवाही बृजेश अवस्थी के घर में ही कराता था। प्रभारी उपनिबंधक रहते हुए सौरभ सिंह ने दूसरे जनपदों की भी कई फर्जी वसीयतें नियमों की अनदेखी करके गलत तरीके से रजिस्टर्ड कर दी थीं। कई मृत लोगों की भी वसीयत कर दीं। सभी वसीयतें मृत्यु के एक-दो दिन पूर्व करायी गई थीं।
एसपी ने बताया कि गिरफ्तार किया गया सौरभ सिंह आपराधिक षड्यंत्र रचते हुए गलत तरीके से बैनामों व वसीयतों का रजिस्ट्रेशन करता था। उसे कोर्ट में पेश करके जेल भेजा गया है। जिले में गठित एसआईटी इन फर्जी बैनामों व वसीयतों से संबंधित मुकदमों की जांच कर रही है।
फर्जी बैनामे व वसीयतें करने के मामले में वांछित चल रहे निलंबित प्रभारी उपनिबंधक सौरभ सिंह की गिरफ्तारी पर आईजी देवीपाटन उपेंद्र अग्रवाल ने एसआईटी को शाबाशी दी है। उन्होंने विवेचक व सौरभ को गिरफ्तार करने वाली टीम को 25 हजार रुपये की धनराशि देकर पुरस्कृत किया है।