बलरामपुर। बच्चों को निमोनिया जैसी जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए नीमोकोकल (पीसीवी) वैक्सीन का टीका लगाया जाता है, लेकिन जिले में दो महीने से पीसीवी उपलब्ध नहीं है। इसके अभाव में अब तक शून्य से पांच वर्ष तक के 25 हजार से अधिक बच्चों का टीकाकरण छूट चुका है। अब अभिभावक बच्चों को निमोनिया का टीका लगवाने के लिए भटक रहे हैं।
बच्चों को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए जन्म से पांच वर्ष के भीतर कई टीके लगाए जाते हैं। इसके लिए जिला अस्पताल में प्रतिदिन और गांवों में बुधवार व शनिवार को विशेष सत्र आयोजित किए जाते हैं। पीसीवी समाप्त होने के कारण बच्चों का टीकाकरण बंद हो गया है। अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए अभिभावक पीसीवी की उपलब्धता जानने के लिए अस्पतालों का चक्कर काट रहे हैं।
चौक उत्तर लाइन निवासी राजीव ने बताया कि बच्चे को टीका लगवाने के लिए दो बाहर महिला अस्पताल जा चुके हैं। राजेश व पप्पू ने बताया कि निजी में भी पीसीवी का टीका नहीं लग रहा है।
तीन चरण में लगता है पीसीवी
निमोनिया से बचाव के लिए बच्चों को तीन चरणों में नीमोकोकल (पीसीवी) वैक्सीन का डोज लगाया जाता है। बच्चे को पहला डोज डेढ़ माह, दूसरा साढ़े तीन माह व तीसरा डोज नौ माह पर लगता है, लेकिन वैक्सीन के अभाव में जनवरी से टीकाकरण ठप है।
छूटे बच्चों के लिए चलेगा विशेष अभियान
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी व एसीएमओ डॉ. एके शुक्ल ने बताया कि जिन बच्चों को पीसीवी का पहला डोज लग चुका है उन्हें एक साल तक कभी भी दूसरा व तीसरा टीका लगाया जा सकता है। वैक्सीन मिलने पर विशेष अभियान चलाकर छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण कराया जाएगा।
शीघ्र उपलब्ध करा दी जाएगी वैक्सीन
निमोनिया से बचाव में लगने वाली नीमोकोकल वैक्सीन के लिए शासन को कई बार डिमांड भेजी जा चुुकी है, लेकिन अब तक नहीं मिली। शासन ने शीघ्र वैक्सीन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
- डॉ. सुशील कुमार, सीएमओ बलरामपुर