गोंडा। अयोध्या के सनबीम स्कूल में दसवीं की छात्रा के साथ दरिंदगी के बाद कत्ल ने शहर के पुराने जख्म को कुरेद दिया है। अयोध्या सरीखी वारदात गोंडा में भी हो चुकी है। दोनों पड़ोसी जिलाें का दर्द मिलता-जुलता है। दोनों स्थानों पर एक महिला और दो पुरुष ही आरोपी रहे। फर्क सिर्फ इतना है कि गोंडा में छात्रा ने बाकायदा सुसाइड नोट लिखकर घर में खुद आत्मदाह कर लिया था।
जिले के नामी-गिरामी फातिमा स्कूल की कक्षा नौ की छात्रा ने साल 2015 में आग लगाकर जान दे दी थी। छात्रा ने स्कूल में हो रही छेड़खानी से परेशान होकर यह कदम उठाया था। छात्रा के पिता की तहरीर पर तीन शिक्षकों के खिलाफ केस दर्ज हुआ, जिसमें से दो जेल भेजे गए थे। बाद में एक शिक्षक दीपक फर्नांडो को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। जबकि सत्र न्यायालय से बरी किए गए आफताब अहमद का मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में विचाराधीन है। आरोपी शिक्षिका के खिलाफ आरोप की पुष्टि ही नहीं हुई थी।
नगर कोतवाली क्षेत्र के एक अभिभावक ने 11 अक्तूबर 2015 को एफआईआर दर्ज कराई थी। तहरीर में आरोप था कि उनकी बेटी शहर के फातिमा स्कूल में कक्षा नौ में पढ़ती थी। नौ अक्तूबर 2015 को बेटी स्कूल गई थी। स्कूल से उनके पास करीब साढ़े 12 बजे मोबाइल पर फोन आया कि उसकी बिटिया की तबीयत खराब है। वह स्कूल जाकर बेटी को घर ले आए।
छात्रा किसी विशेष बात से अत्यधिक परेशान थी। घर में खुद को अकेली पाकर बेटी ने आत्मदाह कर लिया था। लखनऊ में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। उस समय यह बात सामने आई थी कि बदसलूकी और प्रताड़ना से तंग आकर छात्रा ने मौत को गले लगा लिया। उसके बैग से सुसाइड नोट मिला था। जिसमें छात्रा ने शिक्षकों से आहत होकर आत्महत्या करने की बात लिखी थी। इसी के आधार पर शिक्षक दीपक फर्नांडो, आफताब अहमद, रश्मि कपूर व फातिमा स्कूल के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।
घटना से लोगों में जबर्दस्त आक्रोश फैला था। जमकर बवाल ही नहीं हुआ बल्कि छात्रा को इंसाफ दिलाने के लिए करीब एक महीने तक आंदोलन भी चला था। अब अयोध्या के नामी स्कूल में छात्रा से दरिंदगी व छत से फेंककर हत्या की सनसनीखेज घटना ने गोंडा में लोगों के जहन में एक बार फिर यहां की घटना की यादें ताजा कर दी हैं।
फातिमा स्कूल की छात्रा ने भले ही मौत को गले लगा लिया था मगर उसने लिखित रूप से इसके लिए फातिमा स्कूल के साथ-साथ कक्षा के अध्यापक दीपक फर्नांडो, दूसरे अध्यापक आफताब अहमद और रश्मि कपूर को जिम्मेदार ठहराया था। छात्रा ने आत्मदाह से पहले अपने घर में यह बताया था कि शिक्षक दीपक एवं आफताब न केवल छेड़खानी करते रहे, बल्कि उसे अपनी गिरफ्त में लेने के लिए तरह-तरह के षड्यंत्र रचते थे। इस पर पीड़िता के पिता ने 11 जुलाई 2015 और 13 अगस्त 2015 को स्कूल के प्रधानाचार्य को प्रार्थनापत्र देकर अपनी बेटी को आरोपित अध्यापकों से बचाने का अनुरोध किया था।
छात्रा ने 14 अगस्त 2015 को फातिमा स्कूल के प्रधानाचार्य को अपनी बीमारी का हवाला देकर प्रार्थनापत्र दिया था कि मध्यावकाश में उसे सहपाठियों के साथ ही रहने दिया जाए। छात्रा ने ऐसा इसलिए लिखा था, क्योंकि मध्यावकाश में ही रश्मि कपूर उसे रसायन शास्त्र की प्रयोगशाला में बुला लेती थीं, जहां दीपक व आफताब उसके साथ छेड़खानी करते थे। उस समय स्कूल में छात्रा की नहीं सुनी गई थी। लगातार प्रताड़ना और छेड़छाड़ से छात्रा अवसादग्रस्त होती गई फिर बीमारी बढ़ने पर परिजनों ने 12 अगस्त 2015 को उसे लखनऊ के न्यूरो सर्जन डॉ. पीयूष मित्तल और मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव पांडेय को दिखाया था। इन्हीं चिकित्सकों की देखरेख में उसका इलाज चलने लगा। जिस दिन छात्रा ने आत्मदाह किया उस दिन भी वह प्रधानाचार्य के समक्ष उक्त अध्यापकों की शिकायत लेकर गई थी मगर परेशानी दूर करने के बजाय उसे अपमानित करते हुए झिड़क दिया गया था। जिसके बाद उसने जानलेवा कदम उठा लिया।