गोंडा। नाबालिग बालिका से घर में घुसकर दुष्कर्म, अपशब्द कहने, जान से मारने की धमकी व पाॅक्सो एक्ट के मामले में साक्ष्य के अभाव में न्यायालय ने तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। वहीं, झूठी घटना बनाने के मामले में वादी के खिलाफ प्रकीर्ण दांडिक केस दर्ज करने का आदेश दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार धानेपुर के रहने वाले वादी ने थाने में दर्ज कराए केस में कहा कि वह जीवनयापन के लिए मुंबई में रहता है। 17 मई 2018 को उसके घर से फोन आया कि ग्राम रुद्रगढ़ नौसी के अफरीदी व तीन अन्य लोग उसके घर में घुस आए और नाबालिग बहन के साथ दुष्कर्म किया। वह घर आया और अफरीदी के घर उलाहना देने गया तो अफरीदी व उसके चाचा शमशुद्दीन व कमरुद्दीन ने अपशब्द कहते हुए जान से मारने की धमकी दी। विवेचना के दौरान घर में घुसकर दुष्कर्म, अपशब्द कहने, जान से मारने की धमकी व पाॅक्सो एक्ट के अपराध का साक्ष्य मिलने पर आरोपी अफरीदी व अपशब्द कहने, जान से मारने की धमकी के अपराध में शमशुद्दीन व कमरुद्दीन के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। लेकिन ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष न्यायालय में साक्ष्य नहीं प्रस्तुत कर सका। पीड़िता ने बयान में घर में घुसकर दुष्कर्म, अपशब्द कहने, जान से मारने की धमकी व दुष्कर्म से इंकार किया। मंगलवार को मामले में निर्णय सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट राजेश नारायण मणि त्रिपाठी ने आरोपी अफरीदी, शमशु्द्दीन व कमरुद्दीन को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने झूठी व फर्जी घटना बनाकर मुकदमा चलाने के संबंध में वादी के खिलाफ पाॅक्सो एक्ट की धारा 22 के तहत प्रकीर्ण दांडिक वाद दर्ज करने का आदेश दिया है।