बेलसर (गोंडा)। वर्ष 2009 से पहले भेड़पालन एक खास वर्ग के लोगों के रोजगार से जुड़ा था। 90 के दशक में यह ब्लाॅक के कई गांवों में फैला था। उसी के मद्देनजर भेड़ व्यवसाय को बढ़ाने एवं कृत्रिम गर्भाधान से उन्नत नस्ल की भेड़ों के प्रसार के लिए विकास खंड मुख्यालय पर भेड़ एवं ऊन प्रसार केंद्र स्थापित हुआ था। अब यह केंद्र खंडहर में तब्दील हो गया है। गर्भाधान के लिए रखी गई भेड़ों ने भी समय-समय पर दम तोड़ दिया। अब यह योजना कागजों में सिमटकर रह गई है।
बेलसर के इस केंद्र पर भेड़ एवं ऊन प्रसार अधिकारी डॉ. शमीम बानो की तैनाती भी है। क्षेत्र के पशुपालकों की भेड़ों में प्रजनन और कृत्रिम गर्भाधान के लिए वर्ष 2009 में विभाग ने एक दर्जन विभिन्न नस्ल की भेड़ों को उक्त चिकित्सालय पर दिया था। लेकिन वर्ष 2018 और 2019 में उन सात भेड़ों की मौत हो गई। बाद में बची दो भेड़ों ने भी दम तोड़ दिया। पांच साल से बिना किसी भेड़ के ही केंद्र का संचालन हो रहा है। ऐसे में यहां के अधिकारी अब सिर्फ टीकाकरण और भेड़पालकों को प्रोत्साहित करने तक सीमित हैं। यह अलग बात है कि भेड़पालकों का दर्द नहीं दूर कर पा रहे हैं।
आठ वर्ष से नहीं बिक रहे भेड़ के बाल
आठ साल से भेड़ के बाल के खरीदार न आने से मुनाफे में कमी आई। डिडिसिया कला के गड़रिया पुरवा निवासी गुरु प्रसाद ने बताया कि उनके पास दो दर्जन भेड़ें हैं। इसी गांव की आशा ने बताया की भेड़ के बाल 50 से 60 रुपये किलो तक बिक जाते थे। अब कोई भी खरीदार नहीं आता। श्रीराम ने बताया कि उनके पास नब्बे भेड़ें हैं। अब कोई बिक्री ही नहीं है, इससे जीवनयापन नहीं हो सकता है। कहा कि यह धंधा हम लोगों का पुस्तैनी था, लेकिन आगे आने वाली पीढ़ी को इस व्यवसाय से दूर रखना है। रामपाल ने बताया की आठ साल से भेड़ के बाल हम लोगों रखे हैं, हर साल सोचते हैं की शायद अगले साल बिक जाएं। मगर कोई बिक्री नहीं होती।
भेड़ पालक तो हैं, लेकिन बिक्री में कमी आई है। इसके लिए नए विकल्प की तलाश की जाएगी। संसाधनों की कमी है, जो है उसके आधार पर बेहतर सेवाएं देने का प्रयास कर रहे हैं।
- डॉ. सुमित वर्मा, प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी
भेड़ पालने वाले किसानों की समस्याओं की जानकारी कर निदान का प्रयास किया जाएगा। विभागीय कमियों के बारे में उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है।
- डॉ. शमीम बानो, भेड़ एवं ऊन प्रसार अधिकारी