गोंडा। तीन महीने में ही डेढ़ करोड़ का कारोबार करने वाली फर्म की जांच की गई तो जमीन पर उसका कहीं वजूद ही नहीं मिला। सिर्फ फाइलों में दर्ज फर्म कागजी कारोबार करती रही। जिसके बाद उसने 23 लाख रुपये के आईटीसी का दावा भी कर डाला। विभागीय जांच होने के बाद फर्म बोगस पाई गई।
वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) में गलत तरीके से आईटीसी यानी कि इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने वाले मामले पूर्व में बहुत से मिल चुके हैं। ऐसे में अब आईटीसी देने से पहले विभागीय अधिकारी जांच पड़ताल में जुट गए हैं। कोई भी दुकानदार या व्यापारी कहां से खरीद कर कहां सामान बेच रहा है, इसकी जानकारी ऑनलाइन तरीके से ली जा रही है। मनकापुर में पंजीकृत फर्म के आंकड़ों में संदेह मिला तो राज्य कर विभाग एसआईबी के डिप्टी कमिश्नर अमरजीत राम के निर्देशन में जांच टीम मौके पर सर्वे करने पहुंच गई। मनकापुर बाजार में जांच टीम तय पते पर पहुंची तो स्थानीय लोगों ने फर्म के बारे में जानकारी से इंकार कर दिया। पता चला कि यह फर्म तय पते पर कभी नहीं थी। ऐसे में आईटीसी के गलत दावे को विभाग की ओर से रोक दिया गया है।
दिल्ली-पंजाब की निरस्त फर्मों से खरीद
मनकापुर में पंजीकृत फर्म ने तीन माह में दिल्ली और पंजाब की जिन फर्मों से खरीददारी की है, वह पहले से ही निरस्त हैं। ऐसे में खरीददारी भी फर्जी तरीके से दिखाई गई है। बोगस फर्म की कमोडिटी स्टील, लोहे के बर्तन व लकड़ी के सामान दिखाए गए हैं। जांच के दौरान ही राज्य कर विभाग की टीम को पता चल गया था, कि गलत तरीके से खरीद का दावा किया गया है। ऐसे में विभाग की ओर से आईटीसी भुगतान की चोरी रोक दी गई है।
क्या है आईटीसी
जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट का अभिप्राय ऐसे कर से है, जिसका भुगतान एक व्यवसाय की ओर से खरीद के समय निर्धारित दर से किया जाता है। जब वह बिक्री करता है तो वह अपनी कर देयता को कम करने के लिए आईटीसी का उपयोग कर सकता है।
बोगस मिली फर्म
मनकापुर में फर्म का पता दिखाया गया था, लेकिन मौके पर विभागीय सर्वे के दौरान कुछ भी नहीं मिला। तीन महीने में करीब डेढ़ करोड़ के कारोबार के बाद 23 लाख के आईटीसी का दावा किया गया था। मौके पर बोगस फर्म पाई गई।
- मो. इलियास, संयुक्त आयुक्त, एसआईबी-जीएसटी