बलरामपुर। कुत्ता काटने के बाद थर्ड स्टेज वाले मरीजों को रैबीज इम्यूनो ग्लोबीन इंजेक्शन लगवाने की व्यवस्था जिले में नहीं है। किसी भी अस्पताल में यह इंजेक्शन है ही नहीं। इंजेक्शन लगवाने के लिए मरीजों को लखनऊ रेफर किया जाता है।
कुत्ता काटने के बाद घाव से यदि खून निकल आए तो पीड़ित को एंटी रैबीज वैक्सीन के साथ रैबीज इम्यूनो ग्लोबीन इंजेक्शन भी लगवाया जाता है। इस इंजेक्शन का प्रयोग थर्ड स्टेज में होता है। कुत्ता काटने वाले गंभीर रोगियों को यह इंजेक्शन लगवाना अधिक लाभकारी माना गया है, इसके बावजूद जिले के किसी भी अस्पताल में रैबीज इम्यूनो ग्लोबीन इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है।
इस इंजेक्शन के लिए कुत्ते के काटने वाले गंभीर रोगियों को दर-दर भटकना पड़ता है। तुलसीपुर के महेश कुमार ने बताया कि उनके भाई राजू को चार माह पहले एक कुत्ते ने काट लिया था। कुत्ता काटने के बाद घाव से खून निकल रहा था। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एआरवी तो लग गई, लेकिन रैबीज इम्यूनो ग्लोबीन इंजेक्शन लगवाने के लिए उन्हें केजीएमयू लखनऊ जाने की सलाह डाक्टर ने दी। लखनऊ में ही भाई को इंजेक्शन लग पाया।
काफी महंगा होता है इंजेक्शन
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी के अनुसार, रैबीज इम्यूनो ग्लोबीन इंजेक्शन काफी महंगा होता है। इंजेक्शन की एक डोज करीब पांच हजार रुपये में आती है। इस इंजेक्शन की जरूरत कम पड़ती है। अधिक दिनों तक इंजेक्शन का उपयोग न होने पर एक्सपायर होने का डर रहता है। ऐसे में इस इंजेक्शन का स्टाॅक जिले में नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर लोकल परचेज के जरिए पीड़ितों को इंजेक्शन मुहैया कराया जाता है।