गोंडा। समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन की सूचना पाते ही जिले में तमाम की आंखें नम हो गईं हैं। जिले में उनके समर्थकों की कमी नहीं है तो उनका भी जनपद से गहरा नाता रहा है। वर्ष 2003 में सपा की सरकार बनने पर उन्होंने दो मंत्री बनाकर जिले को महत्व दिया। किसानों और बाढ़ पीड़ितों के दर्द को समझा तो बांध बनाने की स्वीकृति के साथ ही दो चीनी मिलों की स्थापना कराने में अहम भूमिका निभाई। युवाओं के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज की स्वीकृति दी।
जिले के दिग्गज सपा नेता बताते हैं कि जब पूर्व मंत्री दिवंगत विनोद कुमार सिंह ‘पंडित सिंह’ पर वर्ष 1993 में फायरिंग हुई थी और कईयों को गोलियां लगीं थीं। मामले की जानकारी होने पर सपा संरक्षक ने उस समय हेलीकाप्टर भेजकर उन्हें आननफानन इलाज के लिए लखनऊ बुला लिया था। जिससे उनकी जान बच सकी। इस एक घटनाक्रम से आम कार्यकर्त्ताओं में उनकी गहरी और प्रभावी नेता की पैठ बन गई थी। सोमवार को सपा संरक्षक के निधन की सूचना से पार्टी के कार्यकर्ताओं में शोक की लहर रही। हर किसी में उनके जमीनी कार्यों की चर्चा रही।
गोंडा जिले को अपनी सरकार में महत्व देने के लिए उन्हें हर कोई याद करता दिखा। वर्ष 2003 में सपा की सरकार बनने में बसपा से विधायक बने करनैलगंज के विधायक योगेश प्रताप सिंह की अहम भूमिका थी। जिसका ईनाम सपा मुखिया ने उन्हें राज्यमंत्री बनाकर दिया। सदर विधायक रहे विनोद कुुमार सिंह ‘पंडित सिंह’ को भी राज्यमंत्री बनाया। यही नहीं वजीरगंज के राम बहादुर सिंह को निगम का चेयरमैन बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा दिया। सपा सरकार में ही करनैलगंज में बाढ़ की समस्या के बारे में तत्कालीन सिंचाई राज्यमंत्री योगेश सिंह ने जानकारी दी तो उन्होंने बांध बनाने की स्वीकृति दिया।
युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए बजट जारी किया और नींव रखी गई। कई पुलों की सौगात के साथ ही किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए जिले में दो और चीनी मिलों को स्थापित कराया। वह खुद चीनी मिलों का शुभारंभ करने आए थे। इससे किसानों में उनकी पैठ गहरी होती गई। बजट आवंटन की बात हो या फिर कोई योजना, जिले का नाम जरूर शामिल रहता था। जिले में उनके कार्यक्रम भी होते रहे हैं।
भाजपा-बसपा सरकार में राजस्व राज्यमंत्री रहे घनश्याम शुक्ल का निधन साल 2004 में हुआ था। उस समय वह गोंडा संसदीय सीट से भाजपा प्रत्याशी थे और मतदान के बाद अपने घर जा रहे थे। भाजपा के कद्दावर नेता और ब्राह्मण वर्ग के नेता घनश्याम शुक्ल के निधन पर सपा संरक्षक (तत्कालीन मुख्यमंत्री) मुलायम सिंह यादव ने उनके परिवार का साथ दिया। शुक्ल की संदिग्ध मौत की सीबीआई जांच की संस्तुति उनकी पत्नी नंदिता शुक्ल की मांग पर की। यही नहीं मुजेहना विधानसभा की रिक्त हुई सीट पर दिवंगत घनश्याम शुक्ल की पत्नी नंदिता शुक्ला को समाजवादी पार्टी से टिकट भी दे दिया। आज भी नंदिता शुक्ल सपा में ही हैं और तीन बार सपा से विधायक बनीं।
सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव जिले के सपा नेताओं का पूरा ख्याल रखते थे। साल 2005 में करनैलगंज के भंभुवा में वह अपनी सरकार में मंत्री रहे योगेश प्रताप सिंह की बेटी की शादी में उनके घर भंभुवा आए। सात जनवरी 2010 को सपा संरक्षक श्रावस्ती जनपद के एक कार्यक्रम में जा रहे थे, इसकी जानकारी उस समय पंडित सिंह को हुई तो उन्होंने सहिबापुर में स्थित अपने स्कूल में आमंत्रित किया। इस पर वह नाराज हो गए और कहा कि वह बहराइच होकर ही जाएंगे। उन्हें उसी समय किसी ने बताया कि आज पंडित सिंह का जन्मदिन है तो वह सहिबापुर आ गए। कार्यक्रम में शामिल हुए और बोले कि बताना था कि जन्मदिन कार्यक्रम है। यही नहीं सपा के जिलाध्यक्ष रहे महफूज खां का भी ध्यान रखा, उन्हें दो बार एमएलसी बनाया।