मालवीयनगर स्थित सगरा तालाब में नाव से जाते श्रीराम, लक्ष्मण व सीता के स्वरूप। स्रोत: वीडियोग्र
गोंडा। मालवीयनगर में चल रही रामलीला में श्रीराम, लक्ष्मण व सीता के वन गमन की लीला का आयोजन सागर तालाब में किया गया। आयोजन समिति के प्रबंधक अनिल सिंह ने बताया कि नगर की प्राचीन रामलीला में भगवान जन्म व भरत मिलाप का आयोजन अलग-अलग स्थानों पर होने की परंपरा है। इसी के तहत सागर तालाब में केवट प्रसंग की लीला हुई।
अयोध्या से 14 वर्ष के वनवास के लिए चले श्रीराम के साथ सीता व लक्ष्मण भी निकल पड़े। मार्ग में नदी पड़ी तो श्रीराम ने निषादराज केवट से नाव से गंगा पार उतारने का अनुरोध किया। भगवान की भक्ति से सराबोर केवट ने पत्थर की अहिल्या को अपने चरण स्पर्श से नारी बना देने की घटना याद दिलाकर कहा कि प्रभु बिना आपके पैर धोए गंगा पार नहीं कराऊंगा, भले ही लक्ष्मण जी क्रोध में मेरा वध कर दें। केवट ने प्रेम से सराबोर वाणी से प्रभु श्रीराम से कहा कि कहीं आपके चरणों की धूल से मेरी काठ की नौका नारी में बदल गई तो मैं परिवार का पालन कैसे करूंगा। इसके बाद केवट ने कठौते में गंगा जल भरकर श्रीराम, लक्ष्मण व सीता के पैर धोए। फिर तीनों को गंगा पार कराया। श्री नटराज अवध रामलीला मंडल अयोध्या के कलाकारों ने सागर तालाब के तट पर केवट प्रसंग का बेहतरीन मंचन किया। जिसे देख श्रद्धालु भावविभोर हो गए।