गोंडा। चार पहिया वाहनों की फिटनेस और प्रदूषण के साथ अन्य प्रपत्र दुरुस्त रखना जरूरी है। मगर प्रदूषण का प्रमाणपत्र तैयार करने में लोग लापरवाही बरत रहे हैं, जबकि इसकी फीस सिर्फ 50 रुपये है और चालान पर जुर्माना दस हजार रुपये तय है।
परिवहन विभाग में आने के बाद प्रदूषण प्रमाणपत्र को लेकर चालान के प्रतिदिन चार से पांच मामले आ रहे हैं। हेलमेट या सीट बेल्ट का चालान होने पर 500 रुपये जुर्माना होता है। इसके साथ वाहन के अन्य कागज न होने पर जुर्माना राशि बढ़ती जाती है। 50 रुपये में बनने वाला प्रदूषण प्रमाणपत्र न होने पर तो दस हजार रुपये तक जुर्माना होता है। बीते वित्तीय वर्ष में वायु प्रदूषण के दो और ध्वनि प्रदूषण के दो चालान हुए थे। इसमें चार पहिया वाहन शामिल हैं। वहीं, विभाग की निगाहें अन्य वाहनों पर टिकी हैं। जिले में 3,404 वाहन बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के ही फर्राटा भर रहे हैं।
एआरटीओ (प्रशासन) बबिता वर्मा ने बताया कि प्रदूषण प्रमाणपत्र 50 रुपये का बनता है। चालान होने के बाद इसके लिए जुर्माना 10 हजार रुपये देना पड़ रहा है। दोपहिया वाहन स्वामियों को इससे अधिक दिक्कत हो रही है। दोपहिया वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र हर छह माह पर बनवाना होता है मगर कम लोग ही इसे बनवाते हैं। उन्होंने बताया कि किसी भी वाहन का चालान होने के बाद सभी कागज मांगे जाते हैं। ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी बीमा और प्रदूषण प्रमाणपत्र दिखाने होते हैं। इनमें से कोई भी कागज न होने पर जुर्माने की धनराशि बढ़ जाती है। लोगों को वाहन के अभिलेख पूरे रखने चाहिए, जिससे परेशानी न हो।