गोंडा। पुलिस कस्टडी में पिटाई से हुए देव नारायन यादव उर्फ देवा की मौत के आरोपी कोतवाल व तीन पुलिसकर्मियों को पुलिस अभी तक तलाश नहीं पाई है। देवा की मौत के छह दिन बाद भी पुलिस आरोपियों का सुराग तक नहीं लगा सकी। पुलिस की तीन टीमें आरोपियों की तलाश कर रही हैं। आरोपी कोतवाल व तीनों सिपाहियों के मोबाइल स्विच ऑफ बता रहे हैँ। इससे सर्विलांस से भी पुलिस को मदद नहीं मिल पा रही है। अब आरोपितों के संबंधियों के जरिए पुलिस उनतक पहुंचने का रास्ता तलाश रही है।
नवाबगंज थाना क्षेत्र के चौहान पुरवा निवासी झोलाछाप डॉक्टर राजेश चौहान की गत दिनों सोते समय रात में गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। प्रकरण की जांच में जुटी नवाबगंज थाने की पुलिस व एसओजी टीम ने मोबाइल कॉल डिटेल के आधार पर इसी थाना क्षेत्र के माझा राठ गांव निवासी बिजली विभाग में आउटसोर्सिंग के जरिए कार्यरत लाइनमैन देव नारायन यादव उर्फ देवा को पूछताछ के लिए 14 सितंबर को थाने में बुलाया था। देवा को लेकर उसके पिता राम बचन यादव अपने दामाद ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दुर्गागंज माझा राधेश्याम यादव के साथ थाना गए थे।
रामबचन का आरोप है कि उनके पहुंचते ही प्रभारी निरीक्षक तेज प्रताप सिंह देवा को लेकर थाना परिसर में पीछे बने एक कमरे में लेकर चले गए। जबकि रामबचन को ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राधेश्याम यादव के साथ प्रभारी निरीक्षक के कक्ष में बैठा दिया गया। कुछ देर बाद प्रभारी निरीक्षक तेज प्रताप सिंह ने बताया कि देवा बेहोश हो गया है उसे जिला अस्पताल भेजा गया है। जब वह जिला अस्पताल पहुंचे तो पुलिस देवा का शव लेकर एंबुलेंस से पहुंची। रामबचन का आरोप है कि देवा को प्रभारी निरीक्षक तेज प्रताप सिंह, थाने के सिपाही मनोज कुमार, धर्मेंद्र सिंह व मिथिलेश के साथ ही एसओजी टीम के पुलिसकर्मियों की पिटाई से उसके बेटे की मौत हुई है।
मामले में रामबचन यादव ने प्रभारी निरीक्षक नवाबगंज तेज प्रताप सिंह व सिपाही मनोज कुमार, धर्मेंद्र सिंह व मिथिलेश के खिलाफ हत्या की नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस अधीक्षक आकाश तोमर ने प्रभारी निरीक्षक तेज प्रताप सिंह व एसओजी प्रभारी अमित यादव को निलंबित कर दिया था। यहीं नहीं एसपी ने 18 सितंबर को एक उपनिरीक्षक समेत और आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया।
आरोपी कोतवाली व तीन सिपाहियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की तीन टीमें उन्हें तलाश रही हैं। मगर आरोपितों को सुराग तक नहीं लगा सकी। पुलिस ने सर्विलांस पर प्रभारी निरीक्षक व तीनों सिपाहियों के मोबाइल नंबर को लिया तो सभी के मोबाइल फोन स्विच ऑफ बताने लगे। इसलिए सर्विलांस से पुलिस टीम को मदद नहीं मिल पा रही है। अब पुलिस आरोपितों के संबंधियों के जरिए उन तक पहुंचने का रास्ता तलाश रही है।