गोंडा। होली के हुड़दंग से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयार है। जिले के 70 अस्पतालों को अलर्ट कर दिया गया है। विशेषज्ञ डॉक्टरों व पैरा मेडिकल स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। दुर्घटना बाहुल्य इलाकों में एंबुलेंस तैनात की गई है।
सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि होली को लेकर जिला अस्पताल, महिला अस्पताल सहित 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व 52 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 24 घंटे खुले रहेंगे। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के किए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमें पूरी तरह से तैयार हैं। जिला स्तरीय अस्पताल में दस-दस बेड व सीएचसी पर पांच-पांच बेड रिजर्व कर दिए गए हैं। लोगों से केमिकल वाले रंगों से दूरी बनाने की अपील की जा रही है।
होली खेलने से पहले अपने पूरे शरीर पर तेल लगा लें। सरसों के तेल की जगह नारियल का तेल लगाना बेहतर विकल्प है। रंग छुड़ाते समय बहुत अधिक साबुन का इस्तेमाल न करें। इससे त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। रंग छुड़ाते समय मुंह और आंखें बंद रखें। ध्यान रखें कि रंग का पानी कान में न जाए। अगर आपको जलन या धुंधलापन लगे, सांस लेने में दिक्कत हो रही हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
एसीएमओ/नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जय गोविंद का कहना है कि बाजारों में मिलने वाला केमिकलयुक्त रंग आंखों व त्वचा के लिए नुकसानदायक है। प्रयास करें कि हर्बल अबीर व गुलाल से ही होली खेलें। रंग खेलें भी तो आंखों का विशेष ध्यान रखें। आंख में केमिकल वाले रंग पड़ने से एजर्ली, संक्रमण व अल्सर का खतरा बढ़ जाता है। आंख में रंग पड़ने के बाद तुरंत साफ पानी से धोएं। करीबी अस्पताल में जाकर नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।
महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. माधुरी त्रिपाठी का कहना है कि होली को लेकर गर्भवती महिलाओं को खास सावधानी बरतनी होगी। होली में प्रयुक्त होने वाले सिंथेटिक रंग गर्भवती व गर्भस्थ शिशु की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बाजार में बिकने वाले सिंथेटिक रंगों में लेड ऑक्साइड, कॉपर सल्फेट तथा पिसा कांच होता है। जिससे नर्वस सिस्टम, किडनी व प्रजनन तंत्र को नुकसान पहुंच सकता है। इससे गर्भपात व बच्चे का वजन कम होने का खतरा रहता है।