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Gonda News: सर्पदंश पीड़ित किशोर को लगाया टिटनेस का इंजेक्शन, मौत

Wed, 28 Aug 2024 12:10 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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अरुण कुमार की फाइल फोटो
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गोंडा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छपिया में सर्पदंश से पीड़ित किशोर को एंटी स्नेक वेनम के बजाय टिटनेस का इंजेक्शन लगाकर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। जिससे किशोर की हालत बिगड़ती गई और मेडिकल कॉलेज पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
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छपिया थाना क्षेत्र के नरायनपुर निवासी मनीराम का पुत्र अरुण कुमार (15) सोमवार सुबह घर के एक कमरे में मोबाइल फोन चार्जिंग पर लगा रहा था। तभी उसके पैर में सांप ने डस लिया। इससे अरुण के पैर से खून निकलने लगा। परिजनों ने आनन-फानन उसे छपिया सीएचसी पहुंचाया लेकिन वहां समय से उपचार नहीं शुरू हुआ। अरुण के बाबा समयदीन ने बताया की सर्पदंश के 20 मिनट के भीतर ही उसे छपिया सीएचसी पहुंचा दिया गया था। सीएचसी पहुंचने तक वह बातचीत भी कर रहा था।
अरुण ने डॉक्टर को बताया कि किस प्रकार के सांप ने उसे काटा। इसके बावजूद डॉक्टर ने बाहर से टिटनेस का इंजेक्शन मंगवाकर उसे लगा दिया। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर बना दिया। समयदीन ने बताया कि बार-बार कहने के बावजूद अरुण को एंटी स्नेक वेनम नहीं लगाया गया। जबकि सीएचसी में एंटी स्नेम वेनम उपलब्ध था। मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर डॉक्टर ने अरुण को मृत घोषित कर दिया। प्रधान प्रतिनिधि अखलाक के सहयोग से सपेरे को बुलाकर तीन घंटे की मशक्कत के बाद सांप को पकड़वा लिया गया। सपेरे के अनुसार सांप जहरीली प्रजाति का है।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से सर्पदंश से बचाव को लेकर जागरूक करने व सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद जरूरत पड़ने पर अरुण को एंटी स्नेक वेनम की डोज नहीं लगाई गई। इससे उसकी मौत हो गई। अरुण अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। उसके पिता विदेश में रहकर काम करते हैं। अरुण की मौत से पूरे गांव में मातम छा गया, परिवार वाले रो-रोकर बेहाल हैं।

सर्पदंश से पीड़ित अरुण को सीएचसी ले जाने पर वहां कोई एलोपैथ डॉक्टर नहीं था। ऐसे में ंआयुष चिकित्सक डॉ. संजय कुमार ने ही प्राथमिक उपचार किया और एंटी स्नेक वेनम लगाए बिना ही उसे रेफर कर दिया। परिजनों का आरोप है कि यदि सीएचसी पर अधीक्षक या एलोपैथ डॉक्टर मिलते और समय से एंटी स्नेक वेनम लग जाती तो अरुण की जान बच सकती थी।
छपिया सीएचसी के अधीक्षक डॉ. अमित कुमार ने बताया कि सीएचसी में सर्पदंश के इलाज की व्यवस्था है। ड्यूटी पर तैनात डॉ. संजय कुमार ने बताया कि सर्पदंश का लक्षण स्पष्ट नहीं होने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद अरुण को मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। समय से उपचार न मिलने का आरोप निराधार है।
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