महिला अस्पताल में प्रसव के बाद नवजात का देखभाल करती स्टाफ नर्स अंशू दूबे। -स्रोत: स्वयं
गोंडा। स्वास्थ्य विभाग में सिस्टर कही जाने वाली नर्सेज दर्द से कराहते मरीजों को दवाओं के साथ अपनेपन की डोज देकर उनके चेहरे पर मुस्कान लाती हैं। जिला महिला अस्पताल के स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में भर्ती अनाथ नवजात की 21 दिन तक देखभाल कर मां की ममता देने वाली आकृति यादव को सम्मानित किया जा चुका है। इसी तरह मेडिकल कॉलेज व महिला अस्पताल में ऐसी 71 स्टाफ नर्सें सेवाएं दे रही हैं। अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर रविवार को आयोजित कार्यक्रम में नर्सों को सम्मानित किया जाएगा।
विगत 19 सितंबर 2023 को मेडिकल कॉलेज के टॉयलेट में एक नवजात के रोने की आवाज सुनाई दी। इमरजेंसी में तैनात स्वास्थ्यकर्मियों ने नवजात को घायल अवस्था में महिला अस्पताल के एसएनसीयू में पहुंचाया। जहां तैनात स्टाफ नर्स आकृति यादव ने बच्चे को अपने जिम्मे लेकर उपचार शुरू किया। 21 दिन तक मां की ममता का फर्ज निभाते हुए नवजात को एसएनसीयू में रखा, जिससे वह पूर्ण रूप से स्वस्थ हो गया। 10 अक्तूबर को जिला प्रोबेशन विभाग की ओर से संचालित अनाथालय में नवजात को भेजा गया। आकृति के इस सराहनीय कार्य से नर्सिंग इंचार्ज अखिलेश गोस्वामी ने उन्हें सम्मानित किया।
जिला महिला अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स अंशू दूबे कोरोना संक्रमण के दौर में चार महीने तक बिना अवकाश लिए मरीजों की सेवा करती रहीं। अस्पताल परिसर में बने आवास में ही अकेले रहकर गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराती रहीं। अंशू ने बताया कि कोरोना के दौर में संक्रमित महिलाओं के पास उनके परिजन भी नहीं जाना चाहते थे, ऐसे में गर्भवती और उनके बच्चे की जान बचाना हमारी जिम्मेदारी बनती थी। पीपीई किट पहनकर अपने परिवार की परवाह किए बिना प्रसव कराए। जिसके चलते खुद भी संक्रमण का शिकार होना पड़ा। स्टाफ नर्स अर्पणा सिंह ने बताया कि पूरे दिन की मेहनत के बाद जब प्रसूताओं के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है तो सारी थकान दूर हो जाती है। कोई-कोई मरीज दवा नहीं खाना चाहता तो उसे अभिभावक की तरह समझाना और डांटना पड़ता है।