कवि डॉ. सतीश आर्य। फाइल फोटो
मनकापुर। ग्राम भिटौरा निवासी प्रख्यात साहित्यकार डॉ. सतीश आर्य (72) का लंबी बीमारी के बाद शुक्रवार को लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में निधन हो गया। शनिवार को मनवर नदी के तट पर बड़े पुत्र नीतीश आर्य ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान क्षेत्र के साहित्यकारों और गणमान्य लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। डॉ. आर्य हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित रचनाकारों में शुमार थे। उन्हें विद्या वाचस्पति, विद्याभूषण और विद्या वारिधि जैसे सम्मान से नवाजा जा चुका था। उनकी प्रमुख कृतियों में महुआ वृक्ष तले, दुई आंखिन की पुतरी भई हिंदी, छंद की छांव में और महुवारी शामिल हैं, जो साहित्य प्रेमियों के बीच खासा लोकप्रिय रहीं। राम हौसिला शर्मा, आरके नारद, बृजराज श्रीमाली, ईश्वर चंद मेंहदावली, धीरज श्रीवास्तव, सुरेंद्र बहादुर, शिवाकांत मिश्र, चंद्रगुप्त भारती, रामानंद सागर, प्रताप नारायण मिश्र, हीरा सिंह, केदारनाथ मिश्र आदि ने डॉ. आर्य के निधन को साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया। (संवाद)