गोंडा। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका स्कूलों में अब पढ़ाई बेपटरी हो रही है। स्कूल में एक तो शिक्षकों की कमी है, दूसरे जो नियुक्त भी हैं वह ड्यूटी से भाग रहे हैं। व्यवस्थाएं न होने से छात्राएं भी स्कूल में रुकने से कतरा रहीं हैं। हाल ही में शासन से हुई जांच में खुलासा हुआ है।
नवंबर में कस्तूरबा स्कूलों की जांच हुई। जिसमें जिले के 17 कस्तूरबा गांधी स्कूूलों में 12 विद्यालयों की जांच हुई। जब जांच की गई तो डेटा चौंकाने वाला है। नवंबर में स्कूलों में 54 शिक्षक उपस्थित मिले। 102 शिक्षक अनुपस्थित रहे तथा छह शिक्षक देर से स्कूल पहुंचे। इतना ही नहीं तीन शिक्षक ऐसे मिले जो स्कूल समय से पहले ही घर चले गए। स्कूल में पढ़ाई पर असर पढ़ने की बात सामने आई है।
बच्चों की हाजिरी की पड़ताल नौ कस्तूरबा स्कूलों में हुई, जिसमें 315 छात्राएं ही उपस्थित मिलीं। बताया जा रहा है कि प्रत्येक स्कूल में सौ छात्राएं पंजीकृत हैं, ऐसे में 900 छात्राओं के उपस्थित होना चाहिए। इस हिसाब से 485 छात्राएं स्कूल से गैर हाजिर मिलीं। आवासीय स्कूल होने के बाद भी छात्राएं अनुपस्थित मिलीं हैं।
इससे स्कूल में आवासीय सुविधा पर होने खर्च में गड़बड़ी की संभावना जताई जा रही है। शासन की ओर से की गई ऑनलाइन जांच की रिपोर्ट जिले को भेजी गई है। स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग के जिम्मेदारों से स्पष्टीकरण लेकर कार्रवाई की बात कही गई है, अब विभाग में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी हो रही है।
पहले भी कस्तूरबा में मिल चुका घपला
कोरोना संकट के समय कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में घपला सामने आ चुका है। उस समय छात्राओं के लिए पौष्टिक आहर और च्वनप्राश ऊंचे मूल्य पर क्रय किए गए थे। जबकि छात्राएं स्कूल में नहीं आ रहीं थीं। इसमें तत्कालीन जिला समन्वयक बालिका शिक्षा रजनी श्रीवास्तव की सेवा तक समाप्त हो चुकी है। वहीं विभागीय अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई थी। अब एक बार फिर कस्तूूरबा स्कूलों की जांच में काफी अंतर सामने आ रहा है।
सुधार के प्रयास किए जा रहे
कस्तूरबा स्कूलों के बारे में रिपोर्ट मिली है। जिसके संबंध में कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सुधार का प्रयास किया जा रहा है।
राम खेलावन सिंह, प्रभारी बीएसए