गोंडा। सरयू नदी महज 24 घंटे में ही फिर उफान पर आ गई है। जलस्तर में उतार-चढ़ाव से तेज कटान शुरू हो गई है।
ग्राम कमियार के पास एलगिन-चरसड़ी तटबंध पर खतरा बढ़ गया है। नदी की धारा मोड़ने के लिए तीन वर्ष से किए जा रहे ड्रेजिंग के काम पर पानी फिर गया है। नदी ने कटान करते हुए अपनी धारा को बांध की तरफ कर लिया है। यह कटान ग्रामीणों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। तीन दिन में नदी ने तेजी से कटान करते हुए करीब दो हजार बीघे जमीन काटकर धारा में समाहित कर ली है। इससे किसानों की मुश्किल लगातार बढ़ती जा रही है। फसलों के साथ जमीन भी नदी में समा रही है। सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से 38 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है।
बीते तीन वर्षों से नदी की धारा मोड़ने के लिए ड्रेजिंग मशीन से बालू निकालकर नदी काे नया रास्ता देने का काम किया गया। मगर नदी के जलस्तर में गिरावट आने के बाद एक बार फिर से नदी पुराने रास्ते को अख्तियार करते हुए कटान कर रही है। ग्राम कमियार के पास नदी कटान करते हुए बांध से टकराने लगी है जो लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इसके साथ ही जहां बाढ़ का प्रकोप रहा वहां मच्छर जनित बीमारियां पनपने लगी हैं। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मांझा रायपुर व नकहरा के लोगों का कहना है कि नदी घटने के साथ ही गांव से पानी तो निकल चुका है मगर कीचड़ और दलदल के साथ रात की नींद हराम है। कीड़े-मकोड़े और मच्छरों के प्रकोप से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। एसडीएम विशाल कुमार का कहना है कि बाढ़ का पानी लगातार घट रहा है। फिर भी बाढ़ क्षेत्र का जायजा लिया जा रहा है। अवर अभियंता रवि वर्मा ने बताया कि शनिवार को सरयू नदी घटकर खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष 105.696 मीटर पर पहुंच गई। जो लाल निशान से 38 सेंटीमीटर नीचे है। गिरिजा, शारदा व सरयू बैराज से कुल 1.90 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जिसके डिस्चार्ज से कोई खतरा नहीं है।
नवाबगंज क्षेत्र में नदी के जलस्तर में गिरावट से लोगो ने राहत की सांस ली थी लेकिन शनिवार को फिर जलस्तर बढ़ने लगा। तेजी से बढ़े जलस्तर के चलते दत्तनगर के बैसिया से ढेमवा जाने का मार्ग पूरी तरह जलमग्न है। ब्योंदा माझा व दत्तनगर में उपजिलाधिकारी भारत भार्गव ने टीम के साथ बाढ़ का जायजा लिया। प्रधान केशव राम ने बताया कि ब्योंदा माझा पूर्ण रूप से बाढ़ प्रभावित है, इसलिए वहां जल्द राहत सामग्री वितरण की जरूरत है। गोकुला प्रधान प्रतिनिधि मनीष सिंह ने बताया की टेपरा जाने वाला मुख्यमार्ग तेज बहाव में कट गया है। नाव का प्रबंध करा दिया गया है, साखीपुर का अट्ठाइसा गांव भी पूरी तरह पानी से घिरा है। पूर्व प्रधान छोटेलाल ने बताया पशुओं के चारे का संकट सबसे ज्यादा है। कई परिवार पलायन कर गए हैं।