गोंडा। सरयू खतरे के लाल निशान से 54 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। नदी के रौद्र रूप धारण करने से जिले के पांच ब्लाॅकों के 20 गांवों में बाढ़ की त्रासदी शुरू हो गई है। इन गांवों के 19 हजार लोग बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। प्रशासन ने इन गांवों के लोगों को बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की है।
बाढ़ का खतरा बढ़ने से करनैलगंज व तरबगंज का तहसील प्रशासन सक्रिय हो गया है। प्रभावित गांवों का भ्रमण कर लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है। तरबगंज में ऐली-परसौली के पास तटबंध के किनारे और उमरीबेगमगंज के पास लोग शरण ले रहे हैं। वहीं, नवाबगंज में पटपरगंज के साथ ही कटरा-अयोध्या मार्ग के किनारे गांवों के लोग आ रहे हैं।
अभी भी लोग घर छोड़ने से हिचक रहे हैं। उन्हें घर तक पानी आने का इंतजार है। जबकि गांव में पानी पहुंच गया है। इसी तरह करनैलगंज में कई गांवों के लोग तटबंध पर अस्थाई आशियाना बना लिए हैं। अपर जिलाधिकारी सुरेश कुमार सोनी ने दोनों तहसीलों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राहत का कार्य पूरा करें। गांवों के लोगों से लगातार संवाद बनाए रखें। इसके अलावा तटबंध की निगरानी ड्रोन कैमरे से बढ़ा दी गई है। तटबंध के किनारों पर बोल्डर डालकर उनकी सुरक्षा की जा रही है।
करनैलगंज (गोंडा)। सरयू का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इससे करीब आधा दर्जन गांव जलमग्न हो गए हैं और गांवों के भीतर तेजी से पानी फैलने लगा है। सरयू के बढ़े जलस्तर से नदी व तटबंध के बीच के गांव नउवन पुरवा, परसावल, नैपुरा, माझा रायपुर पानी से चौतरफा घिर गए हैं। विभिन्न बैराजों से छोड़े गए पानी से बुधवार को नदी में सैलाब दिखाई देने लगा। 10 किलोमीटर से अधिक के दायरे में नदी एल्गिन चरसड़ी बांध से सटकर बह रही है। मंगलवार को छोड़े गए 4.41 लाख क्यूसेक पानी की आमद बुधवार शाम को शुरू हो गई। बुधवार को भी तीन 3.38 लाख क्यूसेक पानी विभिन्न बैराजों से छोड़ा गया है। जिसकी आमद बृहस्पतिवार को शुरू होगी। बांध को ही सुरक्षित मानते हुए ग्रामीणों ने इस पर आशियाना बनाना शुरू किया है। बांध पर तैनात अवर अभियंता रवि वर्मा ने बताया कि लगातार नजर रखी जा रही है। उधर, उपजिलाधिकारी विशाल कुमार का कहना है कि करनैलगंज तहसील क्षेत्र के गांवों की निगरानी के लिए राजस्व कर्मचारियों को लगाया गया है।
तरबगंज तहसील क्षेत्र के सबसे निचले क्षेत्र में स्थित गांव ब्योंदा माझा को सरयू के बढ़े जलस्तर ने अपने आगोश में ले लिया है। जिसके बाद ग्रामीण सुरक्षित स्थानों की तरफ जाने लगे। प्रधान केशव राम यादव ने बताया कि प्रशासन ने प्रभावितों की मदद के लिए दो नाव उपलब्ध करा दी है। इसके साथ ही दर्जन भर गांव पानी से घिर गए हैं। जहां कभी भी बाढ़ की स्थिति गंभीर हो सकती है। तहसीलदार डाॅ. पुष्कर मिश्र ने बताया कि ऐली परसौली में आठ, दत्तनगर, दुल्लापुर, जबरनगर, बहादुरपुर, ब्योंदा माझा में दो-दो नाव पहुंचा दी गई है। अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी नावें पहुंचाई जा रही हैं।
नवाबगंज क्षेत्र के दत्तनगर के बैसिया, पाड़ी, टाड़ी जिव रक्खन पुरवा आदि मजरों में नदी का पानी भर गया है, आवागमन की सड़क भी जलमग्न हो गई हैं। साथ ही साखीपुर, गोकुला, चौखड़िया, तुलसीपुर माझा, जैतपुर, माझाराठ में पूरी तरह पानी भर गया है। प्रशासन ने लोगो को अलर्ट कर दिया है। परसपुर संवाद के मुताबिक सरयू में लगातार तीन दिन से पानी बढ़ने से ग्रामीणों की धड़कन तेज हो गई है। चंदापुर किटौली पंचायत के चार गांव पानी से घिर गए हैं। धुसवा पासिनपुरवा में इस समय कटान भी जारी है। बाढ़ से करीब 126 घर व 950 की आबादी प्रभावित है। बुधवार को उपजिलाधिकारी करनैलगंज विशाल कुमार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर निरीक्षण किया। प्रभावित ग्रामीणों ने अपने मवेशियों को बंधे पर बांध रखा है। पसका क्षेत्र के लेखपाल आत्माराम ने बताया कि बाढ़ से इस समय चंदापुर किटौली का बिचला मांझा के 31 घर, इकनिया मांझा के 72, धुसवा पासिन पुरवा के 12 व नाऊ पुरवा के 11 घर तथा 950 की आबादी प्रभावित है।