गोंडा। अवैध खनन मामले में कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर आरोप लगने के बाद एनजीटी के आदेश पर शुरू हुई जांच अब आगे बढ़ी है। तरबगंज तहसील प्रशासन ने शुक्रवार को नवाबगंज के परसापुर में बालू भंडारण की जांच की। मौके पर मिले अवैध खनन की बालू के टीले का दावा करने कोई नहीं पहुंचा। इस पर बालू कब्जे में लेकर नवाबगंज थाने की पुलिस को 24 घंटे कड़ी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी।
एनजीटी से जांच का आदेश मिलने पर शुक्रवार को तरबगंज तहसीलदार पुष्कर मिश्र के नेतृत्व में राजस्व व पुलिस टीम नवाबगंज कस्बे के कोल्ड स्टोरेज तिराहे पर पहुंची। यहां पांच हजार घन मीटर बालू के भंडारण की अनुमति है। जो कि वजीरगंज थाना क्षेत्र के खानपुर गांव निवासी उमेश सिंह के नाम से है। मगर यहां 12 हजार घन मीटर से अधिक बालू का भंडारण मिला। टीम के समक्ष इस बालू का दावा करने कोई नहीं पहुंचा। पट्टाधारक उमेश सिंह भी खोजे नहीं मिले।
इसके बाद टीम परसापुर के खाले पुरवा पहुंची। यहां मिले बालू भंडारण पर कोई व्यक्ति अपना दावा करने व टीम को कागजात दिखाने नहीं आया। यहां भी बालू को सीज करके पुलिस को निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। टीम ने दत्तनगर गांव में खनन स्थल की जांच की मगर वहां बालू का भंडारण नहीं मिला। तहसीलदार पुष्कर मिश्र ने बताया कि कोल्ड स्टोरेज तिराहे के पास लगभग 12 हजार घन मीटर बालू का भंडारण मिला है। इसकी नापजोख कराकर बालू भंडारण स्थलों व खनन स्थल की वीडियोग्राफी कराई गई है।
प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार राय ने बताया कि बालू भंडारण के दोनों स्थलों पर पुलिस बल तैनात कर दिया है। टीम के साथ नायब तहसीलदार रंजन वर्मा, राजस्व निरीक्षक परशुराम मिश्र, लेखपाल ओमप्रकाश वर्मा, राम प्रकाश पांडेय, सियाराम, निरीक्षक अपराध अरविंद यादव आदि मौजूद रहे।
नवाबगंज में तय सीमा से अधिक बालू भंडारण मिलने से अवैध खनन के संकेत भी मिले हैं। नवाबगंज के साथ ही परसापुर में बड़े पैमाने पर बालू भंडारण मिलने से प्रशासन भी सकते में है। इससे तय है कि बड़े पैमाने पर खनन हुआ है। दत्तनगर में खनन स्थल की भी जांच हुई है। अब तक की जांच में अवैध खनन होने के संकेत मिल रहे हैं।
अवैध खनन में भले ही कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर आरोप लगे हैं और जांच भी शुरू हो गई है। मगर सांसद ने आरोपों से इंकार किया है। खनन से कोई संबंध न होने का दावा किया है। वहीं जांच में बड़े पैमाने पर बालू भंडारण की पुष्टि हुई है। जिससे यह तो तय है कि नवाबगंज में अवैध खनन जारी है। जबकि पूर्व में जुर्माने की कार्रवाई के बाद अवैध खनन पर अंकुश का दावा हो रहा था। अब इस बात की पड़ताल भी होगी कि खनन आखिर कर कौन रहा है। फिलहाल जांच शुरू होने से कइयों के चेहरे की हवाइयां उड़ने लगी हैं।
एनजीटी की ओर से अवैध खनन मामले की जांच के आदेश के साथ ही लखनऊ में मुख्यमंत्री ने भी बैठक कर अवैध खनन पर कार्रवाई का निर्देश दिया है। इसके बाद प्रशासन और गंभीर हो गया है। अवैध खनन को लेकर मुख्यमंत्री के तेवर पहले से ही सख्त रहे हैं, इसके बाद भी खनन होने से अधिकारियों में हलचल है। पूरे मामले पर मुख्यमंत्री की भी सीधी नजर है। इससे भी अधिकारी कोई जोखिम नहीं ले रहे हैं। इस बार अवैध खनन मामले में गंभीर कार्रवाई के संकेत मिलने लगे हैं।
जिलाधिकारी नेहा शर्मा का कहना है कि एनजीटी के निर्देश पर अवैध खनन मामले की जांच शुरू करा दी गई है। नवाबगंज में बालू भंडारण मिला है, जिसे पुलिस के सुपुर्द कर 24 घंटे निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। मामले की जांच पूरी गंभीरता से कराई जा रही है।
भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह का कहना है कि एनजीटी ने अवैध खनन की जांच के आदेश दिए हैं। छह सदस्यीय कमेटी और जिला प्रशासन की टीम अपने स्तर से जांच कर रही है। जिसकी संलिप्तता मिलेगी, वह अपना समझे। डंप मिले बालू के ढेर से हमारा दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। बालू के तमाम कारोबारी हैं। ये लोग लाइसेंस लेकर अपनी जमीन में भंडारण करते हैं। ओवरलोड 700 ट्रकों से बालू खनन पर कैसे किसी को कानोंकान खबर नहीं होगी। जिला प्रशासन, तरबगंज तहसील के राजस्वकर्मी, खनन विभाग, पुलिस और परिवहन के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग क्या आंख मूंदकर ड्यूटी कर रहे हैं? हर घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। ऐसे में अवैध खनन होने पर क्या कोई कार्रवाई नहीं होती। सारे आरोप सरासर निराधार हैं, बेबुनियाद हैं।