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Gonda News: अवध में आतंक की नर्सरी तैयार कर रहा था सद्दाम

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गोंडा। यूपी एटीएस की गिरफ्त में आए सद्दाम शेख ने अवध क्षेत्र के जिलों में आतंक की नर्सरी तैयार करने का जिम्मा संभाल रखा था। उसने भारत की नीतियों के विरोधियों को मंच देने का तानाबाना बुना था। इसके लिए उसने सोशल मीडिया को हथियार बनाया। नेटवर्किंग साइट्स के माध्यम से वह लोगों को उकसा कर अपने जैसा स्लीपिंग मॉड्यूल बना रहा था। यूपी एटीएस ने सद्दाम के फेसबुक अकाउंट से मिलीं ऐसी तमाम पोस्ट की जांच में इसका खुलासा किया था।
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यूपी एटीएस ने देहात कोतवाली क्षेत्र के करनपुर के पठानपुरवा गांव निवासी सद्दाम शेख के फेसबुक अकाउंट के साथ ही उसकी डीपी पर मिले आतंकियों की फोटो के आधार पर जांच के बाद 30 जून को उसे गिरफ्तार किया था। एटीएस की पूछताछ में उसने कई खुलासे किए। अल कायदा व आईएसआईएस से प्रेरित सद्दाम शेख ने सोशल मीडिया के माध्यम से देश विरोधी सोच रखने वाले लोगों को उकसा कर अपने साथ जोड़ने के लिए पूरे अवध क्षेत्र के जिलों को चुना।



उसे मालूम था कि यहां तराई के साथ ही नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में पुलिस की सक्रियता कम है। ऐसे में वह अपने मंसूबों को आसानी से अंजाम दे सकता है। उसने अपने मिशन की कामयाबी के लिए इस क्षेत्र के गरीब तबके के लोगों पर नजर गड़ा रखी थी। सद्दाम शेख ने देहात कोतवाली के पठानपुरवा को इसी उद्देश्य से ठिकाना बनाया था। यहां शहर से दूर कम आबादी वाला इलाका होने की वजह से पुलिस ही नहीं खुफिया एजेंसियों की नजर से भी वह 18 साल तक बचता रहा।
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किस्मत अली भी अब सद्दाम की असलियत नहीं बता पा रहे हैं। उनका कहना है कि वह गुजरात के सूरत से आया था मगर यह नहीं बता सके कि कहां का है। किस्मत अली की मानें तो सद्दाम ने बताया कि था कि वह गोंडा का ही रहने वाला है। किस्मत के दो तरह के बयान से पुलिस भी हैरान है। पुलिस ने किस्मत अली को भी संदेह के दायरे में रखा है। पुलिस अब किस्मत अली के सद्दाम से कनेक्शन को भी खंगाल रही है।



सद्दाम शेख की असलियत क्या है? उसका असली ठिकाना कहां है? इसकी तलाश एटीएस के साथ ही जिले की पुलिस ने भी शुरू कर दी है। मगर परिजनों से मिली जानकारी में अभी तक असलियत सामने नहीं आ पाई है। सद्दाम शेख की पत्नी रुबीना और उसके मामू किस्मत अली बताते हैं कि 2004 में गोंडा आने पर सद्दाम ने बताया था कि उसके माता-पिता की मौत हो चुकी है। वह सूरत रेलवे स्टेशन पर भीख मांगकर खाता था। करनपुर के ही लालापुरवा के रहने वाले एक युवक को सद्दाम ने बताया था कि वह गोंडा का ही रहने वाला है, मगर जिले के किस जगह का रहने वाला है, ये नहीं बता सका था। एटीएस के साथ अब पुलिस भी सद्दाम का असली ठिकाना तलाश रही है।




एटीएस के हत्थे चढ़ा संदिग्ध स्लीपिंग मॉड्यूल सद्दाम शेख वर्ष 2004 में गुजरात से पहली बार गोंडा आया था। यहां वह लालापुरवा में अपने साथी के घर पर कुछ दिनों तक रहा।



गोंडा में ठिकाना बनाने का मंसूबा संजोए वह कुछ ही दिनों में करनपुर के पठानपुरवा निवासी किस्मत अली का करीबी बन गया। किस्मत अली ने इसी गांव के रहने वाले रिश्तेदार मोहर्रम अली से सद्दाम का संपर्क कराया। कुछ ही दिनों में सद्दाम मोहर्रम का भी अजीज हो गया। फिर मोहर्रम अली ने अपनी बेटी रुबीना का सद्दाम से निकाह करा दिया।


सद्दाम करनपुर को अपना ठिकाना बनाना चाहता था। इसी के चलते वर्ष 2005 में उसने दुर्गोड़वा मार्ग पर अपने नाम से एक भूखंड का बैनामा कराया था। जिसके अगले हिस्से में दुकान व पिछले हिस्से में मकान बना है। वर्ष 2009 में सद्दाम ने डेहरास मार्ग पर अपनी पत्नी रुबीना के नाम से दूसरे भूखंड का बैनामा कराया। इसके भी अगले हिस्से में दुकानें व पिछले हिस्से में मकान बना है। रुबीना का कहना है कि सद्दाम दोनों जमीन व मकान बेचने वाला था, इसलिए उसने दुर्गोड़वा मार्ग की संपत्ति अपनी बेटी के नाम पर और डेहरास मार्ग के मकान को तीनों बच्चों के नाम पर बैनामा करा दिया था। (संवाद)
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