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Gonda News: आरटीई पोर्टल पर ‘लापता’ स्कूलों का होगा सत्यापन

Thu, 18 May 2023 11:51 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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संजय तिवारी
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गोंडा। बेसिक शिक्षा से मान्यता प्राप्त के साथ ही सीबीएसई के काॅन्वेंट स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने की तैयारी तेज हो गई है। आरटीई पोर्टल पर पंजीकरण व मैपिंग न कराने वाले 751 स्कूलों की सूची खंड शिक्षा अधिकारियों को भेजी गई है। इससे स्कूलों की वास्तविक स्थिति का सत्यापन होगा। वहीं मैपिंग या पोर्टल पर पंजीयन न कराने के कारणों की भी पड़ताल होगी।
अनिवार्य शिक्षा अधिनियम (आरटीई) से स्कूलों के रजिस्ट्रेशन में बड़े स्तर पर लापरवाही सामने आई है। पहले राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्कूलों को बंद दिखाए जाने पर बच्चों के अधिकार न हासिल होने पर नाराजगी जताई थी। जांच के निर्देश भी दिए थे। इसकी पड़ताल शुरू हुई तो यह बात सामने आई कि 751 स्कूलों ने तो पंजीयन ही नहीं कराया है जिससे ये स्कूल पोर्टल पर नहीं दिख रहे हैं। इसका खुलासा होने पर विभाग ने स्कूलों की सूची जारी कर खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।
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बीएसए अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया कि एक-एक स्कूल का सत्यापन कराया जा रहा है। बच्चों के प्रवेश से बचने के लिए अगर स्कूलों ने ऐसा किया है तो उनके विरुद्ध कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि आरटीई एक्ट से प्रत्येक स्कूल को कक्षा एक और प्री-प्राइमरी कक्षाओं में 25 फीसदी सीट पर प्रवेश देना अनिवार्य है। अभिभावकों के आवेदन पर प्रवेश की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
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... तो कागजों में ही चल रहे हैं 187 निजी स्कूल, रद्द होगी मान्यता
आरटीई पोर्टल की तरह ही यू-डायस पोर्टल से भी कई निजी स्कूलों की सच्चाई सामने आ रही है। जिले के 187 निजी विद्यालय ऐसे चिन्हित हुए हैं जो ब्यौरा ही अपडेट नहीं कर सके हैं। बीएसए ने ऐसे स्कूलों की सूची जारी की है और उनके प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों को नोटिस दिया है। बीएसए ने कहा कि अब तक की प्रक्रिया से यह स्पष्ट हो रहा है कि इन स्कूलों की मान्यता तो विभाग से ली गई है, लेकिन संचालन नहीं किया जा रहा है। यही कारण है कि 187 स्कूलों ने गत माह से चल रही प्रक्रिया में कोई जानकारी नहीं दी है। यहां तक कि इन स्कूलों ने अपना रजिस्ट्रेशन तो कराया है लेकिन शिक्षकों और छात्रों का ब्यौरा दर्ज ही नहीं कर सके हैं। इससे तय है कि इन स्कूलों का संचालन सिर्फ कागजों में हो रहा है। बीएसए ने बताया कि सभी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके बाद इन स्कूलों की मान्यता को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।(संवाद)

प्रदेश के 40 हजार स्कूलों का नहीं है रजिस्ट्रेशन
प्रदेश स्तर पर हुई पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। महानिदेशक ने ऑनलाइन बैठकों में लगातार पंजीयन पर जोर दिया और 28 अप्रैल तक मौका भी दिया था जिससे कि छूटे स्कूल अपना पंजीयन व मैपिंग करा सकें। विभाग की जांच में यह बात सामने आई है कि प्रदेश के करीब 40 हजार स्कूलों ने पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराया है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, एक लाख स्कूल मान्यता प्राप्त हैं, जिनमें 60 हजार स्कूलों ने ही पंजीकरण कराया है। जिन 40 हजार स्कूलों ने पंजीकरण नहीं कराया, उनकी मैपिंग न होने से बच्चे प्रवेश से ही वंचित हो गए हैं। अब इन स्कूलों का सत्यापन खंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से कराया जा रहा है। वहीं कई जिलों में तो एक ही स्कूल दो बार पंजीकृत हैं। वहीं सहायता प्राप्त स्कूलों का भी पंजीकरण करा दिया गया है, जबकि उनको इससे बाहर रखना है। कारण, वहां कक्षा आठवीं तक मुफ्त शिक्षा ही दी जाती है।
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स्कूलों पर की जा रही कार्रवाई
आरटीई पोर्टल पर पंजीकरण न कराने वाले स्कूलों के सत्यापन के पहले भी निर्देश दिए गए हैं। फिर खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट ली जा रही है। जिससे कार्रवाई की जा सके। वहीं यू-डायस पर फीडिंग न कराने वाले निजी स्कूलों पर कार्रवाई की जा रही है।
- अखिलेश प्रताप सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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