करनैलगंज के बहुवन मदार माझा गांव में कटान करती सरयू नदी। - संवाद
गोंडा। सरयू नदी के घट रहे जलस्तर के साथ हो रहे कटान से दोनों तटबंधों पर आफत आ गई है। तटबंधों की सुरक्षा के लिए तैयार किया जा रहा घेरा कटान की भेंट चढ़ता जा रहा है। इससे कटान रोकने के कार्य को अब बंद कर दिया गया है। बांध के पास हो रहे कटान के चलते अस्थायी रास्ते पर आवागमन रोक दिया गया है।
रविवार को भी सरयू नदी का जलस्तर लगातार घटता रहा। कटान भी जारी रहा। इससे करीब आठ मीटर चौड़ाई और एक किलोमीटर से अधिक लंबाई में कटान हुआ। मगर कटान रोकने के उपाय कुछ भी नहीं हो पा रहे हैं। जो भी संसाधन नदी के किनारे लगाए गए थे वह सब नदी में समाहित हो चुके हैं। अब नदी कटान करती हुई बांध की तरफ बढ़ रही है। ग्रामीणों ने बांध से नदी तक आने-जाने के लिए बाढ़ खंड के अधिकारियों द्वारा जो अस्थायी रास्ता बनाया गया था उस रास्ते को काटकर मार्ग भी अवरुद्ध कर दिया है। जिससे कटान रोकने की प्रक्रिया भी रुक गई है।
बाढ़ खंड के अवर अभियंता रवि वर्मा ने बताया कि ग्रामीणों का विरोध देखकर कटान रोकने का कार्य और संसाधन जो नदी के किनारे लगाए जा रहे थे वह बंद कर दिए गए हैं। अब कटान थमने का इंतजार किया जा रहा है। नदी खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर नीचे आ गई है।
बाढ़ के अंतिम दौर में भी बाढ़ से प्रभावित ग्रामीणों की दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं। ग्राम नकहरा गांव के नौ गांव, चंदापुर किटौली के चार गांव के साथ बहुवन मदार माझा गांव से बाढ़ का पानी निकल गया। इसके बाद संक्रामक रोग फैलने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय किया गया है। मगर कीचड़, गंदगी और मच्छरों का प्रकोप ग्रामीणों को अब सताने लगा है।