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Gonda News: एलगिन-चरसड़ी तटबंध का रिंग बांध जोत दिया

Wed, 02 Aug 2023 11:55 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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गोंडा। सरयू में बाढ़ की स्थिति से गांवों की सुरक्षा के लिए बने एलगिन-चरसड़ी तटबंध की सुरक्षा के लिए बनाए गए रिंग बांध को जोतने का मामला सामने आया है। करीब 500 मीटर रिंग बांध को जोतकर खत्म कर दिया गया। इससे मुख्य तटबंध पर खतरा बढ़ गया है।
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करनैलगंज में अभी नदी का प्रभाव तटबंध और नदी के बीच में बसे पांच गांवों में ही है। तटबंध की सुरक्षा के लिए नकहरा में साल 2014 में बने रिंग बांध से ही खतरा टला हुआ है। बुधवार को अचानक रिंग बांध को जोतने की खबर से विभाग में खलबली मच गई। रिंग बांध के न होने या क्षतिग्रस्त होने पर नदी की एक और धारा बन जाएगी। जिससे नदी सीधे मुख्य तटबंध से टकराना शुरू कर देगी। वैसे ही बांसगांव के पास तटबंध के किनारे तक सरयू की एक नई धारा बनकर पहुंच रही है। यह बात अलग है कि तटबंध की सुरक्षा स्पर से हो रही है। वहीं, नकहरा के पास रिंग बांध को जोतकर क्षतिग्रस्त किए जाने से तटबंध पर खतरा बढ़ गया है।
तटबंध की सुरक्षा के लिए बने रिंग बांध को जोतने की सूचना पर उपजिलाधिकारी विशाल कुमार ने बुधवार को मौके पर पहुंचकर जांच की। उन्होंने बताया कि रिंग बांध को क्यों बनाया गया था और क्यों इसे काटा गया? इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित करके जांच कराई जाएगी और कार्रवाई होगी। दूसरी तरफ ग्राम प्रधान किरन देवी के प्रतिनिधि महेश कुमार गुप्ता का कहना है कि जिन लोगों की जमीन पर रिंग बांध बनाया गया था, उन्होंने अपने हिस्से की जमीन पर बने रिंग बांध को जोतकर अपने खेत में मिला लिया है। फिलहाल उस बांध का कोई उपयोग नहीं होता था और न ही बाढ़ रोकने के लिए वह बांध उपयोग में आता था। बांध का हिस्सा कई जगह पहले से कटा हुआ था।
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एलगिन-चरसड़ी तटबंध में घुमाव होने के कारण नकहरा के पास कटान हो जाती थी। इससे नकहरा समेत दो दर्जन गांवों में बाढ़ की तबाही शुरू हो जाती थी। इस पर तटबंध को सुरक्षित करने के लिए वर्ष 2017 में रिंग बांध बनाया गया था। उसके बाद किसानों की जमीन खरीदकर वर्ष 2019 में वहां से करीब 800 मीटर दूर मुख्य बांध बनाया गया। रिंग बांध और मुख्य बांध के बीच ग्राम नकहरा की पूरी आबादी बसी हुई है।
सरयू का जलस्तर इस समय घट रहा है मगर अभी बाढ़ का खतरा बरकरार है। नदी खतरे के निशान से 41 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। इससे तटबंध में कटान का खतरा बना हुआ है। वहीं, बैराजों से पानी का डिस्चार्ज घटा है, बुधवार को 1.95 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज रिकॉर्ड किया गया है।
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