गोंडा। समर्थन मूल्य योजना के तहत धान बेचने वाले करीब 500 किसानों को भुगतान के लिए इस बार भटकना पड़ रहा है। क्रय एजेंसियों की लापरवाही के चलते किसानों का 16 करोड़ रुपये अटका है। खरीद के 20 दिनों बाद भी खाते में पैसा न पहुंचने पर किसान बैंक के चक्कर काट रहे हैं।
धान बेचकर किसान शीतकालीन गन्ने की बीज व खाद का इंतजाम करता है, लेकिन भुगतान के लिए भटकना पाने को पड़ रहा है। लक्ष्य पूरा होने के बाद जनवरी के दूसरे सप्ताह में एजेंसियों के क्रय केंद्र बंद कर दिए गए, लेकिन 16.10 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को नहीं किया गया। खाद्य विभाग की ओर से खरीदे गए धान का शत प्रतिशत भुगतान कर दिया गया है, जबकि अन्य पांच क्रय एजेंसियां किसानों का पैसा दबाए हुए हैं।
हर बार फंसता भुगतान
- सरकार की ओर से किसानों की उपज खरीदने के 72 घंटों में भुगतान करने का सख्त निर्देश दिया गया है। क्रय एजेंसियां लापरवाही करने से बाज नहीं आती। हर साल भुगतान के लिए कई माह तक किसानों को भटकना पड़ता है, इसके बावजूद विभागीय साठगांठ कर फिर उन्हीं एजेंसियों से खरीद कराई जाती है। पिछले साल धान बेचने वाले किसानों को भुगतान के लिए पांच महीने तक भटकना पड़ा था। खरीद सत्र में खाद्य विभाग की ओर से तो शत प्रतिशत भुगतान कर दिया गया।
पीसीएफ की 661.47 लाख रुपये, यूपीपीसीयू की 361.16 लाख रुपये, यूपीएसएस की 251.58 लाख भारतीय खाद्य निगम की 189.30 लाख तथा कृषि उत्पादन मंडी समिति की 146.97 लाख रुपये बकाएदारी है।
ई केवाईसी न होने से भुगतान रुका
जिन किसानों के खाते का ई-केवाईसी नहीं हुआ है। उनका ही भुगतान रुका है। बिना ई-केवाईसी के किया भुगतान वापस हो जाता है। क्रय केंद्र प्रभारियों ई-केवाईसी कराने में मदद करने का निर्देश दिया गया है।
- प्रज्ञा मिश्रा, डिप्टी आरएमओ