गोंडा। किसानों के खेतों में लगे ब्लेड वाले तारों से बड़ी संख्या में छुट्टा जानवर घायल हो रहे हैं। शासन से जारी निर्देश के अनुसार किसान अपने खेत के चारों ओर ब्लेड वाले तार नहीं लगा सकेंगे। अब जिला प्रशासन ने कंटीले तारों को पूर्णतया प्रतिबंधित कर इनकी बिक्री पर रोक लगाने की बात कही है। मामला पकड़ में आने पर रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
अपर मुख्य सचिव पशुपालन के निर्देश पर डीएम डॉ. उज्जवल कुमार की ओर से इस प्रकार के तारों के बिक्री पर रोक लगाए जाने का आदेश दिया था। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रवीद्र सिंह राठौर ने बताया कि जिलाधिकारी की ओर से दुकानों को बिक्री न करने व किसानों को ब्लेड वाले तार का प्रयोग न करने को कहा गया है। ब्लेड से गर्दन और चेहरा कटने से जानवरों की मौत भी हो चुकी है। फसल बचाने के लिए इस अमानवीय कृत्य उचित नहीं है। अपनी फसलों को बचाने के लिए सामान्य तारों का बाड़ा तैयार कर बनाएं।
टीम किसानों को करेगी जागरूक
पशु चिकित्साधिकारियों की टीम को किसानों का जागरूक करने में लगाया गया है। मवेशियों का टीकाकरण करने व इलाज कराने आने वाले किसानों को ब्लेड वाले तारों को न लगाने का सुझाव दिया जा रहा है। किसानों को बताया जा रहा है कि 17 जुलाई को हुई गो सेवा आयोग की बैठक में खेतों में ब्लेड वाले तारों को लगाने पर प्रतिबंध लगाने की संस्तुति की गई। शासन ने ब्लेड वाले तारों को खेतों में लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया।
लंपी वायरस से बचाव के लिए लगेगा टीका
पालतू जानवरों, गोशालाओं में संरक्षित जानवरों के साथ सड़क पर छुट्टा घूम रहे जानवरों को लंपी वायरस से बचाने के लिए टीकाकरण किया जाएगा। करीब चार हजार छु्ट्टा जानवरों को नगर पालिका व नगर पंचायतों के सहयोग से पकड़कर लंपी से बचाव का टीका लगाया जाएगा। इसके लिए मोबाइल टीमें गठित की गई हैं। यदि कोई गोपालक दूसरे जिले से कोई जानवर खरीदकर लाता है तो तुरंत निकटतम पशु चिकित्साधिकारी को सूचना दें।
ब्लेड वाले तारों का प्रयोग नहीं कर सकेंगे
किसान अब ब्लेड वाले तारों का प्रयोग नहीं कर सकेंगे। ऐसा करने पर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। किसानों को अपने खेतों में फसलों की रक्षा के लिए दूसरे उपाय करने होंगे। जिनसे छुट्टा जानवर खेत में प्रवेश करने का प्रयास करते वक्त जख्मी न हों। शासन और प्रशासन की मंशा है कि किसान अपने खेतों की हिफाजत करें लेकिन उनकी वजह से जानवरों की जान खतरे में न पड़े। डॉ. रवींद्र सिंह राठौर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी