गोंडा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भले ही जनसंख्या नियंत्रण के लिए लाखों रुपये फूंककर अभियान चलाए जा रहे हैं मगर जिले की आबादी करीब 41 लाख पहुंच चुकी है। हर साल करीब सवा लाख बच्चों का जन्म हो रहा है। वहीं, परिवार नियोजन की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं पर ही थोप दी गई है। सालभर में 2,524 महिलाओं की नसबंदी हुई मगर कोई भी पुरुष नसबंदी कराने नहीं आया।
विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो जिले की कुल आबादी 40,74,425 लाख के पार पहुंच गई है। इस साल भी 1,26,425 महिलाएं गर्भवती हुईं हैं और 1,13,501 बच्चों का जन्म होने की संभावना है। विभाग की ओर से परिवार नियोजन के साधन अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। स्थायी साधन के रूप में नसबंदी को बेहतर बताया जाता है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में जिले की 2,567 महिलाओं ने नसबंदी कराई मगर एक भी पुरुष नसबंदी कराने की हिम्मत नहीं जुटा सका। पुरुषों में नसबंदी को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं। इसे लेकर पुरुषों को जागरूक करने का प्रयास भी नहीं किया जा रहा है। विभाग की ओर से 11 से 24 जुलाई तक जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है मगर इसमें भी पुरुषों में जागरूकता पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
परिवार नियोजन के साधन अपनाने वालों को प्रोत्साहन राशि दी जाती है। नसबंदी कराने वाली महिलाओं को दो हजार रुपये दिए जाते हैं, जबकि प्रसव के तुरंत बाद नसबंदी कराने वाली महिलाओं को 2500 रुपये प्रोत्साहन राशि मिलती है। वहीं, पुरुषों को नसबंदी कराने पर तीन हजार रुपये दिए जाते हैं।
पुरुषों में भ्रांति हावी है कि नसबंदी कराने से यौन क्षमता में कमी आ जाती है। एसीएमओ डॉ. आदित्य वर्मा ने बताया कि नसबंदी कराने पर भी पुरुष की क्षमता पहले की तरह ही रहेगी। उन्होंने बताया कि महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों की नसबंदी सबसे आसान है। बिना चीरा लगाए सिर्फ एक छोटा सा ऑपरेशन करना पड़ता है। इसके बाद पुरुष सप्ताह भर तक भारी सामान नहीं उठा सकते। फिर सामान्य रूप से सब काम कर सकते हैं।
सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा का कहना है कि पुरुष नसबंदी के लिए जागरूक करने के लिए प्लान तैयार किया गया है। पुरुष स्वास्थ्यकर्मी गांवों में जाकर परिवार नियोजन के साथ ही पुरुष नसंबदी के फायदे बताएंगे।