फोटो-4-गोंडा में नवाबगंज के पटपरगंज चौराहे पर पसरा सन्नाटा। -संवाद
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गोंडा। पुलिस कस्टडी में हुई लाइनमैन की मौत के मामले में गुरुवार को हुए बवाल के बाद शुक्रवार को पूरा नवाबगंज इलाका खामोशी की चादर ओढ़े दिखा। मृतक के माझा राठ गांव में जहां मातमी सन्नाटा था वहीं प्रमुख बाजार से लेकर थाना परिसर तक हर रास्ते पर खाकी का पहरा था। मृतक के गांव को जाने वाली सूनी सड़क पर सिर्फ सांत्वना देने आ रहे लोग ही माहौल में छाया सन्नाटा तोड़ रहे थे। इन सब के बीच गुरुवार को आम लोगों के गुस्से का शिकार बने पुलिस कर्मी गांव की तरफ जाने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे थे।
बीते गुरुवार को भारी बवाल के बाद मृत लाइनमैन का शव माझा राठ गांव ग्रामीणों की घेराबंदी में ही पहुंचा था। इस दौरान पुलिस के साथ ही प्रशासनिक अधिकारी तक लोगों के गुस्से का शिकार होने से बचने के लिए गांव की ओर जाने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे। तनाव पूर्ण माहौल के बीच गांव में ही परिजनों की मौजूदगी में देर रात शव का अंतिम संस्कार दफना कर किया गया। नवाबगंज थाना क्षेत्र में एक झोलाछाप की हुई हत्या के मामले की जांच की जांच में जुटी पुलिस व एसओजी की टीम ने पूछताछ के लिए संविदा पर तैनात लाइनमैन देव नारायन देवा को पूछताछ के लिए थाने बुलाया था।
मृतक के पिता राम बचन यादव खुद अपने साथ उसे लेकर बीते बुधवार को पुलिस थाने पहुंचे थे। उनका आरोप है कि उनके सामने ही देवा को पुलिस कर्मी पीटने लगे। पुलिस की पिटाई के कारण ही उसकी मौत हो गयी। इस घटना को लेकर आक्रोशित बिजली कर्मियों व गांव के लोगों का गुस्सा गुरुवार को भड़क उठा और उन्होंने तीन घंटे से अधिक समय तक गोंडा अयोध्या मार्ग जाम पर उग्र प्रदर्शन किया था।
शादी का सपना रह गया अधूरा
पांच भाई व दो बहनों में देवनारायण देवा भाइयों में तीसरे नंबर पर था। उससे बड़े दो भाइयों और दोनों बहनों की शादी हो चुकी है। घर परिवार के लोग इस बार सहालग में उसके सिर भी सेहरा सजाने की तैयारी में थे। देवा अभी तक अविवाहित था। पिता रामवचन के साथ परिवार के अन्य लोग अब देवा के साथ बिताए खुशनुमा पलों की याद कर सिर्फ आंखों से आंसू बहा रहे हैं।
हलकान रहा प्रशासन
मृत लाइनमैन का छोटा भाई राम नारायण यादव जम्मू के उधमसिंह नगर में सेना में तैनात है। घटना की जानकारी के बाद गांव आने पर उसने मृतक भाई के शव का पोस्टमार्र्टम सैन्य अस्पताल में कराने की मांग कर मौजूद अफसरों को हलकान कर दिया।
मौजूद अफसरों ने आरोपियों की गिरफ्तारी 24 घंटे में सुनिश्चित कराने का भरोसा दिला कर किसी तरह मामले को संभाला। परिजनों द्वारा मृतक का अंतिम संस्कार दफनाकर किए जाने की जानकारी के बाद अफसरों की सांसे शुक्रवार को मुश्किल में रही। उन्हें इस बात का डर सता रहा था कि कही शव का पोस्टमार्टम पुन: सैन्य अस्पताल में कराने की मांग जोर न पकड़े। शुक्रवार को गांव को जोड़ने वाले सभी रास्तों पर पुलिस निगरानी का कड़ा पहरा रहा। पुलिस के बड़े अधिकारी नवाबगंज थाने से पल-पल की खबर लेते दिखे। (संवाद)