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Gonda News: महीने भर में 20 फीसदी तक महंगी हो गई दर्द की दवा

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गोंडा। कोरोना के बाद दवाएं लगातार महंगी होती जा रही हैं। वर्ष 2022 में करीब हर दूसरे महीने दवाओं के दाम बढ़े हैं। साल के अंत में भी हर घर-घर में उपयोग होने वाली दर्द की दवा सूमो 20 फीसदी मंहगी हो गई। ब्लड प्रेशर, शुगर व एंटीबायोटिक दवाओं के दाम भी बढ़ गए हैं। वहीं, जन औषधि केंद्रों पर यही जेनेरिक दवाएं 60 फीसदी तक छूट पर मिल जा रही हैं, मगर प्रचार-प्रसार के अभाव में लोग वहां दवा लेने ही नहीं जाते।
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मार्च 2022 में राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने विभिन्न बीमारियों की दवाओं के दाम बढ़ाने का निर्णय लिया था। उसके बाद से हर दूसरे महीने दवाओं के दाम बढ़ रहे हैं। बदलते मौसम में दर्द व बुखार के लिए हर घर में प्रयोग होने वाली दर्द निवारक टेबलेट सूमो के दाम 20 फीसदी तक बढ़ गए हैं।
दवा व्यवसायी शेष चौरसिया ने बताया कि अक्तूबर माह में 112 रुपये प्रति पत्ता में मिलने वाली सूमो की दिसंबर माह में 136 रुपये की हो गई। ब्लड प्रेशर की दवा एम्लोकाइंड एटी 36 रुपये से बढ़कर 45 रुपये की हो गई। वहीं, शुगर ग्लाइनेस एमएफ, एंटीबायोटिक दवा क्लैवम 625, एंटीबायोटिक इंजेक्शन मोनोसेफ 1.5 के दाम भी बढ़े हैं। बच्चों के मिल्क पाउडर लेक्टोजन व स्माइलेक के दाम में भी इजाफा हुआ है।
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दवाओं के दाम में बेतहाशा वृद्धि के बावजूद जन औषधि केंद्रों में उपलब्ध सस्ती दवाएं नहीं बिक रहीं हैं। प्रचार-प्रसार न होने के चलते मरीज जेनेरिक दवाओं से परहेज कर रहे हैं। जबकि शुगर, बीपी, दर्द निवारक समेत अन्य जीवनरक्षक दवाएं जन औषधि केंद्रों में 50 से 60 फीसदी कम दाम में उपलब्ध हैं।
वरिष्ठ डॉक्टरों का मानना है कि जन औषधि केंद्र की जेनेरिक दवाएं भी उतना ही फायदा करती हैं, जितना ब्रांडेड कंपनियों की महंगी दवाएं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. कुलदीप का कहना है कि दवा कंपनियां सिर्फ ब्रांडिंग का पैसा वसूलती हैं, बाकी जेनेरिक व ब्रांडेड दवाओं में कोई फर्क नहीं होता। मरीज जन औषधि केंद्र से सस्ती दवाएं खरीद सकते हैं।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राकेश सिंह का कहना है कि कच्चे माल के दामों में उछाल आने से दवाओं के रेट तेजी से बढ़े हैं। दवा कंपनियों ने ही रेट बढ़ाए हैं, जिसके चलते मरीजों को महंगी दवाएं दी जा रही हैं। जिले में प्रतिदिन 50 लाख रुपये से अधिक का दवा का कारोबार होता है। इसमें सबसे अधिक दर्द निवारक, मधुमेह, हृदय रोग व ब्लड प्रेशर की दवाओं की ही बिक्री होती है।
दवा व्यवसायी शेष चौरसिया का कहना है कि कोरोना के दौर में जिस तरह दवाओं के दाम बढ़े हैं, उनसे मरीज काफी परेशान हैं। सरकार को चाहिए कि दवाओं के दाम साल्ट के अनुसार एक ही श्रेणी में रखे, ताकि अलग-अलग कंपनियां अपनी मनमर्जी न चला सकें।
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