गोंडा। जिला महिला अस्पताल में इलाज व प्रसव के लिए आने वाली गर्भवतियों की मुश्किलें कम नहीं हो रहीं हैं। बेहोशी के डॉक्टर न होने के कारण तीन दिन से अस्पताल में सिजेरियन ठप है। इससे 47 गर्भवतियों को निजी अस्पतालों में मोटी रकम खर्च कर ऑपरेशन कराने को मजबूर होना पड़ा।
जिला महिला अस्पताल में डॉक्टरों की किल्लत पूरे साल बनी रही। यहां बेहोशी के चिकित्सक की तैनाती नहीं है। सीएमओ के अधीन निश्चेतक चिकित्सक डॉ. कुमार ज्ञानम को महिला अस्पताल में संबद्ध किया गया है। इसके साथ ही इमरजेंसी के लिए चार डॉक्टरों का पैनल नामित किया गया है। मगर आए दिन डॉ. कुमार ज्ञानम बिना सूचना के ड्यूटी से नदारद रहते हैं। पैनल के डॉक्टर भी केस कराने को हाथ खड़े कर देते हैं। महिला अस्पताल में तीन अक्तूबर के बाद से ओटी में ताला लटक रहा है।
स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि डॉ. कुमार ज्ञानम नहीं आ रहे हैं। पैनल के डॉक्टरों को फोन किया गया मगर उन्होंने भी आने में असमर्थता जता दी। इस वजह से सिजेरियन नहीं हो पा रहा है। शुक्रवार को अस्पताल आए तीमारदार संजीव रंजन ने बताया कि दो दिन से उनकी बहू भर्ती है। मगर ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है।
संदेशवा की राजकली ने बताया कि उनकी देवरानी पिंकी को प्रसव पीड़ा हो रही है। पहले बच्चे में ऑपरेशन हो चुका है। अस्पताल आने पर आशा ने बताया कि दो दिन से ऑपरेशन नहीं हो रहा है। इसलिए अब निजी अस्पताल में ले जाना पड़ेगा।
विगत अगस्त महीने में डॉ. कुमार ज्ञानम अवकाश पर थे। वहीं ऑन कॉल पैनल में शामिल डॉ. अनिल तिवारी, डॉ. अनूप सैनी, डॉ. वीपी सिंह व डॉ. नितिन गुप्ता भी 16 दिन केस कराने नहीं पहुंचे। जिससे 200 से अधिक ऑपरेशन प्रभावित हुए थे। डॉक्टरों की कमी के चलते जिला महिला अस्पताल आने वाली गर्भवती को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिला महिला अस्पताल की प्रभारी सीएमएस डॉ. शालू महेश ने बताया कि निश्चेतक चिकित्सक डॉ. कुमार ज्ञानम बिना कोई सूचना दिए अस्पताल नहीं आ रहे हैं। इससे गर्भवतियों का ऑपरेशन प्रभावित हो रहा है। डॉक्टर के बिना सूचना के नदारद होने की जानकारी सीएमओ को दे दी गई है।