गोंडा। नगरीय निकाय सामान्य निर्वाचन-2023 में जिले के दस निकायों के अध्यक्ष एवं 173 सभासद पदों के लिए 968 प्रत्याशी मैदान में थे। निर्वाचन आयोग ने 15 मई को सभी प्रत्याशियों को चुनावी खर्च का ब्योरा जमा करने का निर्देश दिया था। मगर जिले के सभी दसों निकायों के किसी भी प्रत्याशी ने न तो अभी तक चुनावी खर्च का ब्योरा जमा किया और न ही जमानत वापसी की मांग ही की है। वैसे चुनाव में 606 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो चुकी है। 362 उम्मीदवारों की जमानत राशि वापस होनी है। मगर ये भी ब्योरा नहीं दे रहे हैं। जिससे इनकी भी जमानत राशि जब्त हो सकती है।
चुनावी खर्च का ब्योरा देने के लिए वैसे तो 15 अगस्त तक का समय है। मगर 20 दिन में एक भी उम्मीदवार की ओर से चुनाव बाद की रिपोर्ट न देना चौंकाने वाला है। निकाय चुनाव में 10 अध्यक्ष पदों के लिए 103 और 173 सभासद पदों के लिए 865 उम्मीदवार मैदान में थे। बीते चार मई को मतदान व 11 मई को मतगणना से ही साफ हो गया था कि अध्यक्ष व सभासद पद के 606 उम्मीदवारों की जमानत नहीं बच सकी है। जिन्हें जमानत राशि बचाने के लिए निर्धारित मानक से कम मत मिले हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़े के अनुसार अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने वाले 103 उम्मीदवारों में से सिर्फ 21 ही अपनी जमानत बचा सके। जबकि 82 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। इनमें भाजपा के दो, सपा के दो, कांग्रेस के सात, बसपा के छह व आम आदमी पार्टी के दो उम्मीदवार शामिल हैं। नगर पंचायत कटरा बाजार में समाजवादी पार्टी को छोड़कर अन्य सभी 16 उम्मीदवार अपनी जमानत नहीं बचा सके। इसके अलावा 168 वार्डों में सभासद का चुनाव लड़ रहे 524 उम्मीदवारों की भी जमानत जब्त हो गई।
साल 2017 में चुनाव जीतने के बाद भी नगर पालिका परिषद गोंडा की अध्यक्ष उज्मा राशिद, नगर पालिका परिषद नवाबगंज के अध्यक्ष डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह व नगर पालिका परिषद करनैलगंज की अध्यक्ष रजिया खातून, नगर पंचायत परसपुर की अध्यक्ष विमला सिंह, मनकापुर अध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता, कटरा अध्यक्ष शाहजहां व खरगूपुर अध्यक्ष लाल मोहम्मद जमानत राशि वापस नहीं पा सके थे। इन लोगों ने जमानत राशि की वापसी के लिए जरूरी प्रपत्र ही नहीं जमा किए थे। इस बार भी ऐसी ही स्थिति बनती दिख रही है।
सहायक निर्वाचन अधिकारी नारायण ने बताया कि निकाय चुनाव के प्रत्याशियों से खर्च का ब्योरा मांगा जा चुका है। जमानत राशि की वापसी के लिए भी प्रपत्र मांगे गए हैं। अभी तक किसी ने अभिलेख जमा नहीं किए हैं।