गोंडा। जिला अस्पताल में मरीजों के दिल का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। हृदयरोग विभाग बंद करके वहां डायलिसिस यूनिट स्थापित कर दी गई है। वहीं, हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती ही नहीं है। यही नहीं दिल की जांच के लिए मंगाई गई टीएटी व टू-डी इको मशीन व उपकरण भी बिना उपयोग के ही कंडम हो गए। इससे जांच भी नहीं हो पा रही है। जिला अस्पताल में बेहतर इलाज नहीं मिल पाने के कारण दिल के मरीजों को विवश होकर निजी अस्पतालों में महंगे इलाज को मजबूर होना पड़ रहा है।
ठंड का मौसम शुरू होते ही जिले में दिल के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है। हर रोज करीब 20 लोग हृदय संबंधी समस्या लेकर जिला अस्पताल आ रहे हैं मगर उनके दर्द का कोई इलाज नहीं है। विगत 30 अप्रैल 2020 को हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. जीके सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद हृदय रोग विभाग (25 नंबर कमरा) डॉक्टर विहीन हो गया। कुछ समय बाद हृदयरोग विभाग का रंगरोगन कर यहां डायलिसिस यूनिट बना दी गई। इसी कक्ष में फिजीशियन डॉ. समीर गुप्ता की ओेपीडी भी शुरू हो गई। डॉ. गुप्ता यहां आने वाले दिल के मरीजों की ब्लड प्रेशर व सामान्य जांच कर रेफर कर देते थे, लेकिन कुछ महीने पहले उन्होंने त्यागपत्र दे दिया।
जिला अस्पताल में करीब दस साल पहले हृदयरोग की जांच के लिए टीएमटी व टू-डी इको मशीनों की खरीद की गई थी। इससे मरीजों की हार्ट बीट मापकर हार्टअटैक की आशंका का आंकलन होना था, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते इन मशीनों को अब तक स्थापित ही नहीं किया जा सका। ओपीडी में आने वाले मरीजों का इलाज सिर्फ ईसीजी के सहारे चल रहा है। बीते साल तत्कालीन प्रमुख अधीक्षक डॉ. घनश्याम सिंह ने जांच से जुड़ी कई मशीनों को कंडम घोषित कर दिया था। अब जिला अस्पताल में न डॉक्टर बचे, न ही जांच मशीनें। ऐसे में हृदय रोगियों के लिए नर्सिंग होम या लखनऊ के हायर सेंटर ही सहारा बनते हैं।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. जितेंद्र मिश्र का कहना है कि सर्दी के मौसम के हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में हृदय रोगियों को उचित बचाव की जरूरत है। ठंड में पर्याप्त ऊनी कपड़ों से शरीर ढके रखें। बुजुर्ग दिल की दवाएं अपने साथ रखें तथा समय-समय पर उनका सेवन करते रहें। उच्च कैलोरी वाले भोजन तथा शराब से बचें। गर्म पानी से स्नान करें तथा नियमित व्यायाम करें। बुखार या गले में खराश होने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। हार्ट अटैक पड़ने की स्थिति में समय से उचित इलाज होने से जीवन बचाया जा सकता है। हार्ट अटैक के बाद शुरुआती एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है, जिसे गोल्डन आवर कहते हैं, इसके अंदर ही हृदयरोग विशेषज्ञ से इलाज कराएं।
जिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. इंदुबाला ने बताया कि जिला अस्पताल में हृदयरोग विशेषज्ञ की नियुक्ति को लेकर लगातार पत्राचार किया जा रहा है। बीते दिनों ही शासन को पत्र भेजकर हृदय रोग के इलाज से जुड़े डॉक्टर तथा जरूरी जांच मशीनें उपलब्ध कराने की मांग की गई है, ताकि मरीजों को इलाज की बेहतर सुविधा मिल सके।