पिछले दिनों जिला प्रशासन की ओर से नौ रैनबसेरों को चिह्नित कर उसे दुरुस्त करने के लिए अफसरों के साथ एडीएम सुरेश कुमार सोनी ने कलेक्ट्रेट में बैठक की थी। इसके बाद जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी राजेश श्रीवास्तव ने कहा था कि जरूरतमंदों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी कर सभी रैनबसेरों को दुरुस्त करने के लिए अनुरोध किया गया है। ठंड के मौसम में सर्द हवाओं बचने के लिए रैनबसेरों में सुचित इंतजाम किए जाएंगे। मगर अफसरों ने गंभीरता से नहीं लिया।
मेडिकल कॉलेज में रैन बसेरे के नाम पर सिर्फ टीनशेड है। यहां तीमारदारों व जरूरतमंदों को खुली हवाओं में बिना कंबल व बिस्तर के ही रात गुजारनी पड़ती है। कर्मचारियों व तीमारदारों ने बताया कि अस्थाई रैन बसेरे स्टोर में तब्दील है। वहीं, जिला महिला अस्पताल में तीन बेड व गंदगी के चलते रात गुजारना मुश्किल हो रहा है।
सफाई, खाना व दवाई समेत इंतजाम नहीं
आईटीआई चौराहे के पास बने जिला नगरीय विकास अभिकरण के शेल्टर हाउस में कुल 60 बेड हैं। एक स्वयंसेवी संस्था को संचालन के लिए दिया गया है। मगर यहां सोने के लिए महज बेड का ही इंतजाम है। भोजन व दवाई जैसी व्यवस्थाओं में ताला पड़ा हुआ है। शौचालय से लेकर डाॅरमेट्री तक में गंदगी की भरमार है। यहां ठंड की रात गुजारने में मुश्किलें हो रही है।
धन के अभाव में शेल्टर हाउस की सुविधाएं दुरुस्त नहीं
बस अड्डे के पास अस्थाई रैन बसेरा बनाया जाएगा। अभी तक नहीं बना है। धनाभाव में सेल्टर हाउस की सुविधाएं दुरुस्त नहीं हो पा रही हैं। अधिकारियों के आदेश पर जल्द व्यवस्थाएं दुरूस्त कराई जानीं हैं
संजय कुमार मिश्र, ईओ नगर पालिका
लिया जाएगा जायजा
ठंडक के साथ ही रैन बसेरों की व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जानीं हैं। मगर अभी तक कहीं कोई व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई है। जल्द ही मौके का जायजा लेकर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए अनुरोध किया जाएगा
- राजेश कुमार श्रीवास्तव, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी