गोंडा। जिला महिला अस्पताल में जच्चा-बच्चा की जिंदगी से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। बीते कई दिनों से इलाज में लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं। सिजेरियन प्रसव के बाद बच्चेदानी फटने व नवजात शिशु की मौत का एक मामला बृहस्पतिवार को सामने आया। करनैलगंज के छतईपुरवा सकरौरा निवासी राजीव रतन शुक्ल ने सीएमएस को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया कि उसकी बहू विभा शुक्ला को विगत सोमवार को प्रसव पीड़ा होने पर जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोप है कि आॅपरेशन के दौरान डॉक्टर व कर्मी आपस में लड़ाई करने लगे जिससे गर्भवती की बच्चेदानी फट गई तथा खून बहने लगा। आनन-फानन में ऑपरेशन कर बच्चेदानी निकाल दी गई लेकिन लापरवाही होने से नवजात का शरीर नीला पड़ गया। प्रसूता व नवजात को एक निजी अस्पताल ले जाया गया जहां नवजात की मौत हो गई।
जांच के लिए टीम गठित
- राजीव रतन शुक्ल की शिकायत के अनुसार तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी गई है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राम लखन, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सौम्या शुक्ला व डॉ. एस. कुमार को जांच कर तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
- डॉ. शालू महेश, सीएमएस महिला अस्पताल
सप्ताह भर में 20 प्रसूताएं रेफर
- महिला अस्पताल में लगातार प्रसूताओं की मौत का मामला सामने आने के बाद अब डॉक्टर जिम्मेदारी से बचने के लिए प्रसूताओं को रेफर कर दे रहे हैं। बृहस्पतिवार को आपरेशन टेबल पर हालत बिगड़ने पर प्रसूता प्रीति को रेफर कर दिया गया। सामान्य प्रसव के बाद नारायनपुर ईंधा निवासी सुखमता पत्नी दीपनारायन को रेफर कर दिया गया। हालांकि इनका प्रसव सुरक्षित हुआ था, कम खून होने के कारण रेफर किया गया। इसी प्रकार पिछले एक सप्ताह में 20 प्रसूताएं रेफर की जा चुकी हैं।