गोंडा। सीबीआई की विशेष अदालत ने शनिवार को भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामले में दोषसिद्ध पूर्व सांसद विनय कुमार पांडेय और निजी सहायक को दो साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपने फैसले में साढ़े 11 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। हालांकि, सीबीआई की विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने सजा सुनाने के बाद दोनों अभियुक्तों को जमानत दे दी।
तीन वर्ष से कम कारावास की सजा होने से इन्हें जेल नहीं जाना पड़ा। राउज एवेन्यू डिस्ट्रक्टि कोर्ट (सीबीआई-एमपी/एमएलए) में शनिवार को गहमागहमी रही। सुबह साढ़े दस बजे शुरू हुई अदालती कार्रवाई में अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की मौजूदगी में कोर्ट ने आदेश सुनाया। मामले में दोषी कांग्रेस के पूर्व सांसद विनय कुुमार पांडेय उर्फ बिन्नू और उनके तत्कालीन निजी सहायक अरविंद कुमार उर्फ अरविंद तिवारी उपस्थित रहे।
18 जनवरी को कोर्ट ने दोनों अभियुक्तों को दोषी करार दिया था। फिर 23 जनवरी को सजा के बिन्दुओं पर सुनवाई करते हुए आदेश सुरक्षित करते हुए 28 जनवरी को सजा का ऐलान की तारीख मुकर्रर की थी।
सीबीआई की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक पंकज गुप्ता ने पैरवी की। अधिवक्ता विक्रम सिंह पवार और मनोज पंत ने पूर्व सांसद विनय पांडेय का बचाव किया। मुकदमे में दूसरे दोषी और पूर्व सांसद के निजी सचिव अरविंद कुमार के बचाव में अधिवक्ता अभय पांडेय ने दलील दी।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की तरफ से दर्ज कराए इस मुकदमे में भादवि की धारा 120 बी और 420 के साथ-साथ 13 (2) आर-डब्ल्यू 13 (1) (डी) पीसी एक्ट के तहत कोर्ट ने पहले ही दोषी करार दे दिया था। शनिवार को विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने पूर्व सांसद विनय पांडेय को धोखाधड़ी के मामले में दो साल सश्रम कारावास और एक लाख रुपए अर्थदंड, भ्रष्टाचार के अपराध में दो वर्ष कठोर कारावास व साढ़े दस लाख रुपए अर्थदंड से दंडित किया। सहअभियुक्त अरविंद कुमार को धोखाधड़ी के जुर्म में दो साल की सजा और एक लाख रुपए के जुर्माना का हुक्म सुनाया।
साल 2016 के संशोधन का मिला लाभ उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता और सीबीआई कोर्ट के जानकार आदर्श तिवारी ने बताया कि इस केस में दोनों अभियुक्तों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साल 2016 के संशोधन का विशेष लाभ मिल गया। इसी तहत इन्हें चार साल से कम की सजा हुई। यह मुकदमा साल 2012 का है, उस समय भ्रष्टाचार के अपराध में एक वर्ष की न्यूनतम सजा का ही प्रावधान था। जोकि संशोधन के बाद चार वर्ष में तब्दील कर दिया गया। कोर्ट ने दोनों अभियुक्तों को तीन साल से कम अवधि की सजा सुनाई है, लिहाजा इन्हें अपील दाखिल करने के लिए जमानत मिल गयी।
सीबीआई ने दर्ज कराया था मुकदमा सीबीआई ने 21 मार्च 2016 को जालसाजी, धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया था और विवेचना के दौरान पुख्ता साक्ष्य मिलने पर 24 दिसंबर 2016 को पूर्व सांसद विनय पांडेय व अरविंद कुमार के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। आरोप था कि उन्होंने लोकसभा सदस्य रहते साल 2012 में फर्जी ई-टिकट और फर्जी बोर्डिंग पास से यात्रा दिखाकर नौ लाख 71 हजार 384 रुपये का भुगतान ले लिया।