गोंडा नगर के जानकीनगर में बैठे बंदर।
गोंडा। राम नगरी से लाकर जिले में छोड़े गए बंदर व स्थानीय बंदरों के झुंड के बीच हो रहे वर्चस्व की जंग से आम लोग हलकान हैं। डीएफओ कार्यालय पर लगातार बंदरों के उत्पात की शिकायतें मिल रही हैं। वहीं, डीएफओ ने शासनादेश का हवाला देते हुए उत्पाती बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी नगर पालिका, नगर पंचायतों और ग्राम पंचायतों को सौंप दी है।
बंदरों के बढ़ते आतंक को देखते हुए प्रभारी वनाधिकारी पंकज शुक्ल ने जिला पंचायत राज अधिकारी लालजी दूबे, सिटी मजिस्ट्रेट चंद्रशेखर व सभी ब्लाॅकों के बीडीओ को पत्र लिखकर अवगत कराया कि संरक्षित वन्य जीवों की सूची से वन विभाग ने बंदरों को बाहर कर दिया है। ऐसे में सिर्फ उत्पाती बंदरों को ही वन विभाग पकड़ सकता है।
महिला अस्पताल, जानकीनगर, कचहरी में भी बंदरों के उत्पात से लोग परेशान हैं। बंदरों को पकड़ने के लिए निकायों व ग्राम पंचायतों को बजट आवंटित किया गया है। नगर पालिका, नगर पंचायत व ग्राम पंचायतों की ओर से बंदर पकड़े जाएंगे। जरूरी होने पर बंदरों को जंगल में छोड़ने के लिए जरूर वन विभाग की मदद ली जा सकेगी। पालिका व पंचायतें बंदर पकड़ने वाली निजी संस्था को पैसा देकर पकड़वा सकती हैं।
जंगल में छोड़ने में मदद करेगा वन विभाग
नगर पालिका, नगर पंचायत व ग्राम पंचायतों की ओर से बंदर पकड़ने वाली संस्था से संपर्क कर पकड़वाया जाए। यदि जंगल में छोड़ने में कोई समस्या आती है तो वन विभाग पूरा सहयोग करेगा। उत्पाती व खतरनाक बंदरों को वन विभाग पकड़वा सकता है।
- पंकज शुक्ल, डीएफओ