विष्णुपुरी में छठ माता का पूजन करती महिलाएं। -संवाद
गोंडा। भगवान बलराम का जन्मदिवस हलषष्ठी पर्व जिलेभर में धूमधाम से मनाया गया। माताओं ने व्रत रखकर पुत्रों की लंबी उम्र की कामना की। इस दिन महिलाओं ने हल चलाकर उगाया गया अन्न नहीं खाया। मंगलवार सुबह महिलाओं ने पलाश के पत्ते से बने कुल्हड़ में चना, दही व तिन्नी का चावल रखा। मिट्टी के दिए में चना रखकर पूजन किया। मान्यता के अनुसार घर में एक-दूसरे को इससे जुड़ी कथाएं सुनाईं। फिर मां से अपने पुत्रों के दीर्घायु होने की कामना की। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं ने दीवारों पर चावल के पीठे से हलछठ मैया का चित्र बनाया। वहीं शहरी क्षेत्र में महिलाओं ने बाजार से पोस्टर खरीदकर पूजन किया। फिर पूरे दिन व्रत रखकर भजन कीर्तन किया। बताया जाता है द्वापर युग में भाद्रपद मास की कृष्णपक्ष की छठ को भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। बलराम का प्रधान शस्त्र हल व मूसल है। उन्हीं के नाम पर इस पर्व का नाम हलछठ रखा गया।