पचपेड़वा (बलरामपुर)। मिशन हॉस्पिटल में डिलीवरी के बाद डॉक्टरों ने महिला के बच्चे को मृत बता कर सिद्वार्थनगर के बढ़नी में एक सभासद के पास भेज दिया।
महिला ने बच्चे के जिंदा होने का दावा कर डाक्टरों पर बेचने का आरोप लगाया तो पुलिस के होश उड़ गए। पुलिस ने आरोपी दो डॉक्टरों को गिरफ्तार कर बच्चे को जिंदा बरामद कर लिया है। हालांकि बच्चा रखने वाला सभासद पकड़ा नहीं गया। पुलिस का दावा है कि वह नेपाल भाग गया।
पचपेड़वा के जूड़ी कुइया स्थित मिशन अस्पताल एवं जच्चा बच्चा सर्जिकल केंद्र में गौरा चौराहा थाने के झाउवआ गांव की पुष्पा देवी को डिलीवरी के लिए एक माह पूर्व भर्ती कराया गया था। प्रसव पीड़ा होने पर डा. अकरम जमाल ने 29 अक्तूबर को आपरेशन किया।
महिला ने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन चिकित्सकों ने उसके घरवालाें को बच्चे की मौत हो जाने की जानकारी दी। इसकी जानकारी पर प्रसूता सदमें में चली गई। फिर भी उसका मन नहीं माना और उसने घरवालों से कई बार कहा कि उसका बच्चा मरा नहीं है। 26 नवंबर को उसने थाने में तहरीर दी।
जिसमें उसने बच्चे को जीवित होने का दावा करते हुए उसे बेच देने का आरोप लगाया। थानाध्यक्ष अवधेश राज सिंह ने बताया कि तहरीर पर जांच कराई तो उन्हें भी शक हुआ। एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। आपरेशन के दौरान मृत बच्चे के बारे में सही जवाब न मिलने पर हॉस्पिटल के संचालक डा. अकरम जमाल को गिरफ्तार किया।
उससे पूछताछ के बाद आपरेशन करने वाले बढ़नी के रूबी हेल्थ केयर के डॉक्टर हफीजुर्रहमान को भी दबोचा गया। पूछताछ के बाद बच्चे के जीवित होने की जानकारी मिली। पता चला कि बच्चे को बढ़नी नगर पंचायत के वार्ड नंबर दो के सभासद निसार को दिया गया है।
पुलिस ने निसार के घर से बच्चा बरामद कर लिया। आरोप है कि डाक्टर ने निसार को बच्चा बेचा है, लेकिन पुलिस का कहना है कि बच्चा बेचने की पुष्टि निसार के पकड़े जाने पर हो पाएगी। पूछताछ में डॉक्टर ने कहा कि बच्चा बेचा नहीं है। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि सभासद नेपाल भाग गया है। उसे जल्द ही पकड़ा जाएगा।