गोंडा। अवैध बालू खनन के मामले में जिम्मेदार चिह्नित होने के बाद भी प्रशासन की निगरानी फेल रही है। जिसके परिणाम स्वरूप खनन का दायरा बढ़ता गया। हद तो यह है कि खनन माफिया पर कार्रवाई फाइलों में ही सीमित रही। 212 करोड़ रुपये के जुर्माने के मामले में भी आगे किसी ने पैरवी करने की जहमत नहीं उठाई। इससे अवैध खनन करने वालों के हौसले बुलंद रहे।
अब अयोध्या के राजाराम सिंह की शिकायत पर कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह का नाम जुड़ा और एनजीटी ने कड़े तेवर अपनाए तो फिर छानबीन तेज हुई। नवाबगंज में दो स्थानों पर बालू का अवैध भंडारण मिलने और किसी की ओर से जिम्मेदारी न लेने पर जब्त करके पुलिस की निगरानी में सौंपी गई है। अब निगरानी में कहीं लापरवाही न हो, इसके लिए भी प्रशासन सतर्क नजर आ रहा है। अगर ऐसे ही सजगता पहले से रही होती तो इतने बड़े पैमाने पर अवैध बालू भंडारण नहीं हो पाता। अवैध बालू खनन में हाफिज अली के साथ ही उससे जुड़े 32 लोगों को पूर्व में ही चिह्नित किया जा चुका है। साल 2010-11 से हर साल कोई न कोई कार्रवाई भी होती रही है। इसके बाद भी कड़ी निगरानी नहीं होेने से आज मामला हाईप्रोफाइल हो चुका है। कैसरगंज सांसद पर आरोप लगाए जाने से कई तरह के सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
बालू खनन के मामले में नवाबगंज क्षेत्र हमेशा चर्चा में रहा है। चक रसूल और कल्याणपुर गांव में अवैध खनन का मामला सामने आया और कार्रवाई हुई तो खनन माफिया ने रास्ता बदल दिया। दूसरे जिलों में खनन का जाल फैलाया, जिसके बाद खनन करने वाले भी बढ़ गए। क्षेत्र के लोलपुर, दुर्गागंज, तुलसीपुर, दत्तनगर, जैतपुर आदि गांवों में बड़े पैमाने पर खनन होता है। स्थिति यह रही कि प्रशासन ने स्थानीय लेखपाल और खनन निरीक्षकों तक ही कार्रवाई सीमित रही। जबकि खनन में कई सफेदपोश भी शामिल रहे, लेकिन उनका बाल भी बांका नहीं हो सका।