सप्ताह भर में ही दो सगे भाइयों की मौत से परिवार में मातम, स्वास्थ्य टीम ने शुरू किया उपचार
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संवाद न्यूज एजेंसी
महाराजगंज तराई (बलरामपुर)। खसरे का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। बृहस्पतिवार रात खसरे से पीड़ित चार वर्षीय बच्चे की निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। इससे पहले 17 फरवरी को इसी बच्चे के छोटे भाई की भी मौत हो चुकी है। गांव के 31 लोग खसरा की चपेट में हैं। इस पर स्वास्थ्य टीम ने शुक्रवार को गांव पहुंचकर बीमार लोगों का इलाज शुरू कर दिया है।
तुलसीपुर के धनौड़ा के मजरे नबीनगर में दस दिन से खसरा फैला है। यहां के साबिर अली ने बताया कि उनका छोटा बेटा मुखबिर (2) खसरे से बीमार था। 17 फरवरी को घर में ही उसकी मौत हो गई थी। दूसरा बेटा दिलदार (4) भी खसरे की चपेट में आ गया। मंगलवार को स्वास्थ्य टीम गांव में आई थी। टीम ने दिलदार को एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेज दिया। वहां हालत गंभीर देख डॉक्टरों ने दिलदार को बहराइच रेफर कर दिया।
साबिर के मुताबिक बहराइच ले जाने के बजाय एंबुलेंस के कर्मचारियों ने उसके बेटे को एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। वहां बृहस्पतिवार रात उसकी मौत हो गई। साबिर का आरोप है कि जांच के नाम पर एंबुलेंस कर्मियों ने उससे 3,700 रुपये भी ले लिए।
इसके अलावा नबीनगर गांव में मोमिना (5), सना (6), सबीना (5), अकील (5), मीनाक्षी (4), अकील (8), रजा (9), उस्मान (6), आशिक अली (2), तरूकुननिशा (5), जीशान रजा (6), परवीन बानो (5), इशहाक (2), फहीम (4), अतीकुरहमान (6), धनौडा गांव के सर्वजीत (14), अमरजीत (10), पूजा (4), अमृता (3), इंद्रजीत (3), सानवी (5), विंध्यवासिनी (35), वर्षा (29), राखी (7), ऋषि (13) व वैष्णवी (4) सहित 31 लोग बीमार हैं। साबिर अली की मौत व कई बच्चों समेत अन्य लोगों के बीमार होने से गांव में मायूसी छाई है।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. सुमंत सिंह चौहान ने बताया कि तुलसीपुर सीएचसी के डॉ. मनीष प्रताप सिंह की अगुवाई में स्वास्थ्य कर्मचारियों की टीम गांव भेजी गई है। बीमार लोगों के खून की जांच करने के साथ ही दवाओं का वितरण किया जा रहा है।
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गंदगी को लेकर गंभीर नहीं जिम्मेदार
गांव में स्वच्छता के लिए भले ही हर साल दस हजार रुपये दिए जाते हों मगर गांव में जगह-जगह गंदगी की भरमार है। साफ-सफाई न होने से नालियां चोक हैं। ग्रामीण अजय, साबिर, रवि प्रताप, जिलेदार व शकील ने गांव में दवा के छिड़काव व साफ-सफाई कराने की मांग की है।