गोंडा। भाई की हत्या कर साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी को न्यायालय ने सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषी को 55 हजार रुपये अर्थदंड से भी दंडित किया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी अभिनव चतुर्वेदी ने बताया कि कोतवाली देहात क्षेत्र के ग्राम वासुदेव पुरवा मौजा नरायनपुर्र ईंधा निवासी सुनील तिवारी ने कोतवाली में तहरीर दी थी। इसमें बताया कि एक जुलाई 2020 को दोपहर करीब तीन बजे वह चाचा प्रेमचंद तिवारी के घर के बगल की गली में गया था। वहां देखा कि जमीन कुछ ऊंची थी और उस पर धान का पुआल पड़ा था। चाची कुसुम तिवारी को दिखाया और जमीन बराबर करने लगा तो दुर्गंध आने लगी। पुलिस को बुलाकर जमीन खोदवाने पर बड़े पिता लालमणि तिवारी का शव मिला। आशंका जताई कि चाचा प्रेमचंद तिवारी ने हत्या कर शव छिपाया है।
पुलिस ने केस दर्ज कर विवेचना की और भाई लालमणि तिवारी की गला दबाकर हत्या कर साक्ष्य मिटाने का सबूत मिलने पर प्रेमचंद तिवारी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। ट्रायल के दौरान न्यायालय ने हत्या व साक्ष्य मिटाने के अपराध पाए जाने पर अभियुक्त प्रेमचंद तिवारी को दोषसिद्ध किया। मंगलवार को मामले में निर्णय सुनाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय डॉ. दीनानाथ तृतीय ने प्रेमचंद तिवारी को सश्रम आजीवन कारावास और 55 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।