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नहीं मिल रहे सम्मान निधि लेने वाले 1.70 किसान

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फोटो-10 गोंडा में मनकापुर के अधियारी में आयोजित शिविर में ईकेवाईसी की जानकारी देते उपकृषि निदेशक। - फोटो : GONDA
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गोंडा। अभी तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का फायदा उठा रहे लाभार्थी किसान अब फर्जीवाड़ा रोकने को हो रहे ईकेवाईसी व सत्यापन से बच रहे हैं। जिले के ऐसे 1.70 लाख किसानों ने कृषि विभाग की परेशानी बढ़ा दी है। गांवों में सत्यापन के दौरान यह किसान खोजने पर भी नही मिल रहे हैं। ऐसे लाभार्थियों का ईकेवाईसी व सत्यापन न हो पाने से फर्जीवाड़ा की आशंका भी जतायी जा रही है। शासन स्तर से ईकेवाईसी कराने के कई मौके देने के बाद अब डिफाल्टर पात्रों की 12वीं किस्त राशि पर ब्रेक लगना तय माना जा रहा है। योजना के दौरान चल रहे पात्रों के सत्यापन में अब तक 20400 किसान अपात्र चिह्नित हो चुके हैं। इनके खिलाफ निधि की हड़पी गयी धनराशि को वसूलने की कार्रवाई भी प्रशासन के स्तर से जल्द ही शुरू होगी।
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जिले में पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ पाने के लिए पांच लाख किसान चिह्नित हुए थे। इनमें बड़ी संख्या में अपात्र लोगों के शामिल होने की शिकायत के बाद शासन ने सभी लाभार्थियों के ई केवाईसी को अनिवार्य कर दिया था। इसके तहत लिए लाभार्थी किसान को किसी भी जनसेवा केंद्र के माध्यम से अपना ई केवाईसी कराना था। ई केवाईसी न कराए जाने किसानों को निधि के तहत मिलने वाली 12वीं किस्त रोक दी जाएगी। इसके साथ ही सम्मान निधि योजना का लाभ ले रहे किसानों के भूमि सत्यापन का कार्य भी किया जा रहा है। यह कार्य लेखपाल व कृषि विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा किया जा रहा है। अब तक जिले के 1.70 लाख लाभार्थी किसान लगातार मौका मिलने के बाद ईकेवाईसी कराने से बच रहे हैं। सत्यापन के दौरान भी यह डिफाल्टर राजस्व व प्रशासन विभाग की टीम को खोजने पर भी नहीं मिल रहे हैं। सत्यापन के दौरान अब तक सम्मान निधि का लाभ पाने वाले 20,400 किसान अपात्र भी चिह्नित हो चुके हैं।
उपकृषि निदेशक शैलेंद्र कुमार शाही ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार अब उन्हीं किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ दिया लाएगा, जिन्होंने पीएम किसान पोर्टल पर जाकर अपने खाते का ई-केवाईसी व सत्यापन करवा लिया हो। अभी तक हुए सत्यापन में 20,400 अपात्र किसान सम्मान निधि का फायदा उठाते पाए गए हैं। इनमें से कुछ की मौत भी हो चुकी है जबकि कुछ भूमिहीन हैं तथा कई ऐसे लाभार्थी भी मिले जो एक परिवार का होने के बावजूद योजना का लाभ ले रहे थे। इनमें से मृतक लाभार्थियों की वरासत के आधार पर उनके परिवार के अगले मुखिया को योजना के तहत लाभार्थी बना दिया जाएगा और बाकी अपात्रों के किसान सम्मान निधि पर रोक लगा कर अब तक हड़पी गयी धनराशि की रिकवरी कार्रवाई तय होगी। (संवाद)
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