ट्रांसप्लांट के बाद कारी कमाल अहमद।
वजीरगंज (गोंडा)। विरहमतपुर निवासी शमसुद्दीन ने अपने बड़े भाई को किडनी देकर रिश्तों की मिसाल पेश की। मंगलवार को सफल किडनी ट्रांसप्लांट होने के बाद कारी कमाल अहमद को जीवनदान मिला तो छोटे भाई के प्यार को देखकर उनकी आंखों में आंसू आ गए।
विरहमतपुर निवासी कारी कमाल अहमद बहराइच के एक मान्यता प्राप्त मदरसे में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं। तीन साल से खराब किडनी की समस्या से जूझ रहे थे। डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट का सुझाव दिया था, लेकिन आर्थिक स्थिति सही न होने से किडनी ट्रांसप्लांट नहीं करवा सके। हालात बिगड़ने के बाद फरवरी में लखनऊ के पीजीआई में भर्ती करवाया गया। वरिष्ठ किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. नारायण प्रसाद ने किडनी ट्रांसप्लांट करवाना बेहद जरूरी बताया।
डॉक्टरों ने कहा कि बिना किडनी बदले जान नहीं बचाई जा सकती है। भाई के जान को खतरा होने की बात सुनकर छोटे भाई शमसुद्दीन से रहा नहीं जा सका। उन्होंने अपनी एक किडनी देने का प्रस्ताव रखा। भाई के प्रति प्रेम देखकर डॉक्टरों ने जरूरी जांच कराकर किडनी ट्रांसप्लांट करने की तैयारी की।
मंगलवार को डॉक्टरों की टीम ने सर्जरी कर शमसुद्दीन की एक किडनी कारी कमाल अहमद के शरीर में सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट कर दी। वरिष्ठ किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. नारायण प्रसाद व डॉ. गुलाब झा ने बताया कि हाईब्लड प्रेशर के कारण कमाल अहमद की किडनी खराब हो गई थी। सफलतापूर्वक किडनी ट्रांसप्लांट कर दिया गया है। जल्द ही दोनों की अस्पताल से छुट्टी हो जाएगी।
कम पढ़े लिखे भाई ने पढ़ा दिया रिश्तों का पाठ
गांव वालों ने बताया कि शमसुद्दीन बहुत कम पढ़ा लिखा है, लेकिन अपनी किडनी देकर युवा पीढ़ी को रिश्तों का पाठ पढ़ा दिया। वह कहता है कि भाई से बढ़कर दुनिया में कुछ भी नहीं हो सकता। मेरे एक किडनी देने से बड़े भाई की जान बच गई। जब तक खुदा चाहेगा। हम दोनों भाई साथ रहेंगे। कमाल अहमद ने भीगी आंखों से कहा कि अल्लाह ऐसा ही भाई सबको दे। मेरे लिए बेटे से भी बढ़कर काम किया है।