तरबगंज (गोंडा)। तरबगंज के घांचा बीकापुर निवासी गायत्री देवी रामलला के प्राण प्रतिष्ठा का आमंत्रण पत्र पाकर प्रफुल्लित तो थीं ही, लेकिन सोमवार को भगवान राम की अचल विग्रह मूर्ति का दर्शन कर उनकी आंखों में आंसू छलक आए।
33 साल पहले 2 नवंबर 1990 को भगवान राम जन्मभूमि के अस्तित्व को पाने के लिए गायत्री देवी के पति रमेश पांडेय ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। एक कारसेवा के दौरान पुलिस की गोली लगने से उनकी मौत हो गई थी। जिस सपने को आंखों में सजोकर पति ने खुद को बलिदान कर दिया था उसी सपने को आज साकार होते देख गायत्री देवी की आंखें डबडबा गईं। गायत्री देवी ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण मिलने के बाद निर्धारित समय सुबह दस बजे वो मंदिर प्रांगण में पहुंच गई थीं। राम लला की अलौकिक छवि को एकटक देखती रहीं।
दूसरी तरफ अयोध्या में रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में आमंत्रित किए गए ज्योतिषाचार्य ने आंखों देखा दृश्य बयां किया। उस समय आंखों में खुशी के आंसू लिए हुए स्वर्ग से भी सुंदर महसूस होने की बात बताई।
खरगूपुर नगर पंचायत के निकट भगवानदीनपुरवा निवासी ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश तिवारी अयोध्या ज्योतिष रत्नाकर पंचांग संकटमोचन हनुमान मंदिर के संरक्षक भगवान रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में रविवार को आमंत्रित किए गए थे। सोमवार को ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस महान व ऐतिहासिक दिवस में पहुंचना ही बड़े सौभाग्य की बात है। भगवान के प्राण-प्रतिष्ठा के लिए पूरा देश तो राममय था ही, इसके अलावा विश्व में भी अखंड रामायण पाठ, सुंदरकांड पाठ व भगवान राम के भजन से लोगों ने स्वागत किया है। जिसकी कल्पना गांधी जी ने स्वयं की थी, यही तो रामराज्य है।