गोंडा के परसपुर में सीएचसी पर निरीक्षण करते एईएस-जेई के नेशनल टीम की सदस्य। -संवाद
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गोंडा। जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई) और एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से पीड़ित मरीजों के इलाज प्रबंधन की जमीनी हकीकत परखने के लिए केंद्रीय टीम ने बुधवार को ईटीसी व पीकू वार्ड का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद टीम के सदस्य जेई पीड़ित एक मरीज मरीज का हालचाल जानने के लिए उसके घर तक गए।
जिले में बीते वर्ष जेई व एईएस के 51 मरीज चिह्नित हुए थे। इससे संक्रमित बच्चों की इलाज के लिए नौ सीएचसी पर ईटीसी (इंसेफ्लाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर) भी बनाया गया है। जबकि जिला अस्पताल में पीड़ित बच्चों का इलाज पीआईसीयू वार्ड में किया जाता है। इंसेफ्लाइटिस नियंत्रण व इलाज की व्यवस्था परखने के लिए बुधवार को कार्यक्रम से जुड़ी केंद्रीय टीम ने निरीक्षण कर इलाज की व्यवस्थाओं को परखा। टीम के सदस्य परसरपुर के बद्री रामभारी गांव भी पहुंचे जहां उन्होंने जेई संक्रमित साहिल के घर वालों से मिलकर पीड़ित बच्चे को मिल रहे इलाज के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।
जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग की आईसीयू पहुंची केंद्रीय टीम ने भर्ती बच्चों की बीएचटी का भी गहन निरीक्षण किया। इस दौरान बीएचटी में चिकित्सकों द्वारा किए गए परीक्षण व इलाज से जुड़ी दवाओं के बारे में भी मौजूद चिकित्सकों से गहन चर्चा कर जेई व एईएस आशंकित बच्चों की पैथालॉजी रिपोर्ट भी देखी।
टीम ने पीड़ित बच्चों को मुहैया कराई जा रही इलाज सुविधा व दवाओं के बारे में बाल रोग वार्ड प्रभारी डॉ. आफताब आलम से भी विस्तार से बातचीत की। केंद्रीय टीम में नेशनल टीम टेक्निकल एडवाइजर डॉ. पदम विश्वल, प्रोजेक्ट आफीसर शिवम सिंधे, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी जयगोविंद, जिला सलाहकार जेई व एईएस आशीष श्रीवास्तव मौजूद रहे।