-एसी बोगियों के होने से अधिक नहीं हुई जनहानि, कम थी रेल मुसाफिरों की संख्या
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-दूरगामी ट्रेनों के जनरल कोच में 200 से लेकर 300 तक रहती है यात्रियों की भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी गोंडा। बोगियों की सेटिंग ने चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस हादसे में बड़ी जनहानि से बचा लिया। असल में इंजन के बाद वातानुकूलित बोगी ही लगी थी, जिससे हादसे का दायरा सीमित ही रहा। अक्सर इंजन के बाद सामान्य बोगी लगती हैं। ऐसे में बड़ी जनहानि की आशंका होती।
रेल अधिकारियों के अनुसार एसी की बोगी अन्य से सुरक्षित होती हैं, उनमें यात्री भी सीमित रहते हैं। इसके अलावा सामान्य बोगी होने पर 200 से लेकर 300 तक सवार हो जाते हैं। इंजन के बाद सामान्य बोगी लगी होने पर बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। हादसे से भले ही रेलवे कई सवालों से घिरा हो, लेकिन हादसे में जनहानि चार ही होने से ज्यादा दबाव नहीं रहा।
आयुक्त व डीएम ने ट्रेन में यात्रियों का जाना हाल गोंडा। आयुक्त शशि भूषण लाल सुशील व जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने विशेष ट्रेन से भेजते समय यात्रियों से बातचीत की। डीएम के अनुसार राहत और बचाव कार्यों को सफल बनाने में ग्रामीणों की भूमिका अहम रही। हादसे की सूचना के 14 मिनट में एंबुलेंस मौके पर पहुंची और डीएम ने भी मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य का मोर्चा संभाले रखा।