गोंडा। पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के पांच साल पुराने मामले में शनिवार को कोर्ट का फैसला आया। इसमें आरोपी पति को सात साल कारावास और 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) घनश्याम पांडेय ने बताया कि दिनेश कुमार निवासी खैरा रेलवे काॅलोनी बड़गांव ने नगर कोतवाली में तहरीर दी थी। इसमें कहा कि उसने अपनी बेटी अर्चना का विवाह पांच साल पहले बाराबंकी के रामसनेहीघाट के ग्राम मऊ गोरपुर निवासी विनय कुमार से किया था। पति व ससुराल वाले दहेज में चौपहिया वाहन, सोने की जंजीर व नकदी की मांग को लेकर अर्चना को परेशान करते थे।
27 अप्रैल 2017 को पति विनय कुमार, ससुर अशोक कुमार, सास किरन व उनके रिश्तेदार राजनरायन ने अर्चना को पीटकर घर से भगा दिया। 23 जुलाई 2018 को दहेज उत्पीड़न के विचाराधीन केस में पैरवी करने के लिए अर्चना भाई अखिलेश के साथ कचहरी गई थी। वहां सुसराल वालों ने उस पर चारित्रिक आरोप लगाकर अपशब्द कहे। इससे क्षुब्ध होकर अर्चना ने मायके में आत्मदाह कर जान दे दी थी। मामले में शनिवार को निर्णय सुनाते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-चतुर्थ डॉ. अनामिका चौहान ने आरोपी विनय कुमार को सात साल के सश्रम कारावास और 30 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।