गोंडा। पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के 20 साल पुराने केस में अदालत ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी पति और उसकी मौसी को दोषमुक्त कर दिया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार देहात कोतवाली क्षेत्र के ग्राम धनईपट्टी शुक्लनपुरवा निवासी भवानीफेर शुक्ल ने न्यायालय में प्रार्थनापत्र देकर कहा कि उन्होंने पुत्री सावित्री देवी का विवाह नगर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम मोकलपुर निवासी संजय उर्फ शिव भगवान से किया था।
शादी के बाद से ही पति संजय, ससुर राजकिशोर तिवारी, सास मिथलेश, संजय की दादी सरस्वती देवी व ग्राम हारीपुर निवासी संजय की छोटी मौसी रामरती दहेज में बाइक, टीवी और सोने की अंगूठी की मांग को लेकर सावित्री को प्रताड़ित करते थे। 11 जुलाई 2004 को सूचना मिली कि सावित्री की मौत हो गई है। न्यायालय के आदेश पर केस दर्ज कर नगर कोतवाली पुलिस ने विवेचना की और आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध का साक्ष्य मिलने पर आरोपी संजय व रामरती के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन के प्रार्थनापत्र व साक्ष्य के आधार पर अदालत ने राजकिशोर, मिथलेश व सरस्वती देवी को भी विचारण के लिए तलब कर लिया। मगर मुकदमे के दौरान राजकिशोर तिवारी, मिथलेश व सरस्वती देवी की मृत्यु हो गई।
ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध का साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत नहीं कर सका। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपियों को दोषमुक्त करने की मांग की। बचाव पक्ष की ओर से की गई बहस और पत्रावली में साक्ष्य न होने के आधार पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-चतुर्थ रामदयाल ने आरोपी संजय व रामरती को दोषमुक्त कर दिया।