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गोंडा: एलटी न पैथालॉजिस्ट, 50 लाख का कारोबार

Sat, 18 Feb 2023 06:01 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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महिला अस्पताल में बंद पड़ा अल्ट्रासाउंड जांच का कमरा।
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गोंडा। जिले में धड़ल्ले से सेहत जांच का काला कारोबार फल-फूल रहा है। 100 से अधिक पैथालॉजी हर रोज 50 लाख रुपये का कारोबार कर रही हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग में सिर्फ 30 पैथाेलॉजी का ही पंजीकरण है। हैरत की बात यह है कि अधिकांश जांच केंद्रों पर पैथालॉजिस्ट व लैब टेक्नीशियन तक नहीं हैं। अप्रशिक्षित कर्मियों से मरीजों की जांच कराई जा रही है। मानकों के विपरीत तैयार जांच रिपोर्ट मरीजों की जान जोखिम में डाल दे रहे हैं।
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जिले में नियमों को ताक पर रख 100 से अधिक पैथालॉजी लैबों का संचालन किया जा रहा है। अकेले स्टेशन रोड पर 29 पैथाेलॉजी संचालित हैं। वहीं महिला अस्पताल के ईद-गिर्द 15 जांच केंद्र चल रहे हैं। सीएचसी के आस-पास भी मानकों के विपरीत संचालित जांच केंद्रों का जाल फैला हुआ है। हर रोज सेहत की जांच के नाम पर यहां 50 लाख रुपये तक का कारोबार किया जा रहा है। नियमानुसार पैथालॉजी लैब को संचालित करने के लिए पैथोलॉजिस्ट होना सबसे अहम और जरूरी मानक है।
पैथालॉजी के पंजीयन में लैब टेक्नीशियन को पैथालॉजिस्ट का शपथ पत्र लगाना होता है। पैथालॉजिस्ट चिकित्सक की ओर से शपथ पत्र में बताया जाता है कि यह पैथालॉजी मेरे संरक्षण में चल रही है। मैं इस पैथालॉजी के लैब टेक्नीशियन को भली-भांति जानता हूं। इसके बाद ही स्वास्थ्य विभाग आवेदन स्वीकार कर पैथालॉजी संचालन की स्वीकृति देता है।
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लेकिन अधिकांश लैबों में अप्रशिक्षित कर्मियों से बीमार लोगों की जांच की जा रही है। ऐसे में इन पैथोलॉजी से दी गई जांच रिपोर्ट कितनी भरोसेमंद है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसे में कई मरीजों की बीमारी का कारण ही स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। कई मामलों में तो मर्ज सुधरने के बजाय और बिगड़ गया। कई लोग पैसों के अभाव में उपचार तक नहीं करा पाते हैं और कई ऐसे हैं जो अप्रशिक्षित कर्मियों के हाथों तैयार की गई जांच रिपोर्ट के कारण गलत इलाज कराते हैं और असमय मौत के शिकार हो जाते हैं।

जिम्मेदारों के निरीक्षण पर उठ रहे सवाल
स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर पैथालॉजी लैब व एक्सरे सेंटर, क्लीनिक, नर्सिंग होम व अन्य निजी स्वास्थ्य इकाइयों के निरीक्षण को एक टीम बनाई गई है। जो संबंधित इकाइयों पर मानकों की जांच करती है। कागजों में ये टीमें भले ही जांच कर रही हों, लेकिन धरातल पर असर नजर नहीं नजर आ रहा है। पिछले साल धानेपुर में स्वास्थ्य विभाग ने अवैध पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन पकड़ी, लेकिन कोई खास कार्रवाई नहीं की गई।
महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड बंद सरकारी अस्पतालों में आए दिन जांच ठप रहने के कारण ही मरीजों को बाहर से महंगी व मानकविहीन जांच करवानी पड़ रही है। शुक्रवार को जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड ठप रहा। बाहर नोटिस चस्पा था कि डॉक्टर नहीं हैं, आज अल्ट्रासाउंड नहीं होगा। ऐसे में करीब सौ से अधिक गर्भवतियों को बाहर से अल्ट्रासाउंड व अन्य जांच करवानी पड़ी। जबकि सभी 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती सहित अन्य लोगों को जांच के लिए निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र की शरण लेना पड़ रहा है।
अवैध जांच सेंटरों पर होगी कार्रवाई
- अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की कमी के कारण नियमित निरीक्षण व छापामार अभियान नहीं चल पा रहा है। सिर्फ दो एसीएमओ हैं, जिनके जिम्मे दर्जन भर स्वास्थ्य योजनाओं का भार है। जल्द ही टीम बनाकर अवैध जांच सेंटरों पर कार्रवाई की जाएगी।
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- डॉ. रश्मि वर्मा, सीएमओ
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