रास्ते में हो गया बच्ची का जन्म
कौड़िया बाजार निवासी रुपरानी को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन जिला महिला अस्पताल लेकर आए थे। भर्ती होने के करीब दो घंटे बाद तक प्रसूता प्रसव पीड़ा से तड़पती रही। मौके पर मौजूद चिकित्सक ने राहत के लिए तत्काल आपरेशन की जरूरत जताई। लेकिन बेेहोशी का डॉक्टर न होने के कारण रात में सिजेरियन न हो पाने से तीमारदार मजबूरी में प्रसूता को रिफर करा कर एक निजी नर्सिंग होम लेकर भागे। इसी दौरान एंबुलेंस में ही बच्ची का जन्म हो गया। तीमारदार अनिल तिवारी ने बताया कि यहां आपरेशन की सुविधा न होने की बात कहकर निजी अस्पताल भेजा गया था।
केस दो
अस्पताल के गेट से ही लौटना पड़ा वापस
खरगूपुर शुक्लपुरवा निवासी अलगू प्रसाद ने बताया कि बीते मंगलवार की रात पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचा था। अस्पताल के गेट पर पहुंचते ही वहां मौजूद स्टॉफ ने बताया दिया कि यह लाना बेकार है, बेहोशी का डॉक्टर न हो पाने के कारण आपरेशन नहीं हो पाएगा। जच्चा बच्चा की जान बचाने के लिए पत्नी को बिना भर्ती कराए ही निजी अस्पताल में लाकर सिजेरियन प्रसव कराना पड़ा।
गोंडा। जिला महिला अस्पताल में प्रसव के लिए पहुंचने वाली गर्भवती को अगर शाम को प्रसव पीड़ा होने लगे तो उसे दर्द से छुटकारे के लिए सुबह तक का इंतजार करना पड़ता है। अस्पताल की ओटी में शाम ढलते ही ताला लटक जाता है। इसके साथ ही प्रसूताओं को इलाज की अन्य सुविधा भी नहीं मिल पाती। अस्पताल में बेहोशी के डॉक्टर की कमी से गंभीर स्थिति में आने वाली प्रसूताओं को निजी अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती होना पड़ता है। उक्त दो मामले तो बस अस्पताल पहुंचने पर होने वाली परेशानी की बानगी मात्र है। प्रसव के लिए यहां आने वाली गर्भवतियों को तमाम परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।
अस्पताल में बेहोशी के डॉक्टर के तीन में से दो पद बीते पांच माह से खाली हैं जबकि एकमात्र तैनात बेहोशी के डॉक्टर बीती 28 अक्तूबर से अवकाश पर हैं। ऐसे में दिन में तो ओटी का कार्य सीएमओ आधीन तैनात चिकित्सक के भरोसे निपट जाता है। लेकिन शाम के बाद इमरजेंसी में आने वाली गर्भवतियों को सर्जरी की सुविधा न मिल पाने से परेशानी उठाना पड़ती है। बीते 48 घंटों में महिला अस्पताल में प्रसव के लिए देर शाम बाद भर्ती हुई करीब आधा दर्जन महिलाओं को बेहोशी का डॉक्टर न होने की परेशानी के कारण घंटो दर्द से तड़पना पड़ा। बाद में स्थिति बिगड़ती देख इनमें से कई प्रसूताओं को रिफर करा कर निजी अस्पताल ले जाना पड़ा।
पांच माह से परेशानी, फिर भी सभी उदासीन
जिला महिला अस्पताल में बेहोशी के डॉक्टर की कमी के चलते पिछले पांच महीनों से सिजेरियन आपरेशन प्रभावित हो रहे हैं। अस्पताल में बेहोशी (निश्चेतक) चिकित्सक के तीन पदों के सापेक्ष तीन डॉक्टर तैनात थे। इनमें से मई माह में बेहोशी के चिकित्सक डॉ. योगेंद्र सिंह सेवानिवृत्त हो गए तथा डॉ अनूप कुमार सैनी की संबद्धता खत्म कर दी गई। इसके बाद ओटी का पूरा जिम्मा डॉ. यूसुफ मोबीन किदवई के जिम्मे आन पड़ा। डॉ. किदवई भी 28 अक्तूबर से छुट्टी पर चल रहे हैं। ऐसे में वर्तमान में सीएमओ के अधीन तैनात चिकित्सक डॉ. कुमार ज्ञानम के सहारे ही दिन में तो आपरेशन हो जाते हैं लेकिन शाम ढलते ही ओटी पर फिर से ताला पड़ जाता है।
निजी नर्सिंग होम संचालन उठा रहे फायदा
जिला महिला अस्पताल में व्याप्त बदहाली का फायदा निजी नर्सिंग होम संचालक उठा रहे हैं। शाम होते ही महिला अस्पताल में आपरेशन न होने का फायदा उठाने के लिए निजी अस्पतालों की एंबुलेंस अस्पताल परिसर के आस पास खड़ी हो जाती हैं। नर्सिंगहोम के एजेंट अस्पताल के गेट पर मौजूद रहकर शाम के बाद प्रसव के लिए आने वाली गर्भवतियों के तीमारदारों को कम खर्च में बेहतर सर्जरी सुविधा का झांसा देकर नर्सिंग होम ले जाकर इलाज के नाम पर मोटी धनराशि हड़पते हैं।
बेहोशी का डॉक्टर न होने से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार पत्राचार के बाद भी मुख्यालय स्तर से अस्पताल में रिक्त पदों पर बेहोशी के डॉक्टरों की तैनाती नहीं हुई है। ऐसे में रात में इमरजेंसी पड़ने पर निजी तौर पर बेहोशी का डॉक्टर बुलाकर आपरेशन करवाना पड़ रहा है।
डॉ. सुषमा सिंह, सीएमएस महिला अस्पताल