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प्राइवेट अस्पताल में प्रसव, सरकारी में दिखाया भर्ती

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गोंडा। जिला महिला अस्पताल से गर्भवती को गुमराह कर निजी अस्पताल में प्रसव कराने तथा फर्जी तरीके से महिला अस्पताल में भर्ती करवाकर सरकारी प्रोत्साहन दिलाने का खेल का खुलासा हुआ है। मंगलवार को एक आशा कार्यकर्ता को फर्जी तरीके से प्रसूता का बीएसटी (मरीज भर्ती पत्रक) भरे जाने के मामले में पकड़कर पुलिस को सौंपा गया।
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बीते रविवार को एक आशा कार्यकर्ता जिला अस्पताल में प्रसव हुए बिना ही महिला अस्पताल में भर्ती करवा दिया। भर्ती काउंटर पर तैनात स्टाफ नर्स प्रियंका शुक्ला ने बताया कि 28 अगस्त को उमरी बेगमगंज के लिलोई खुर्द शिवबक्स पुरवा निवासी श्रीदेवी को महिला अस्पताल में भर्ती करा दिया। आशा ने भर्ती रजिस्टर में इंट्री करवाकर बाकायदा बीएसटी (मरीज भर्ती पत्रक) भरवा दिया। नर्स बीएसटी पर बच्चे का निशान लेने पहुंची तो बच्चा था ही नहीं। पूछने पर पता चला उसका प्रसव बहराइच रोड स्थित एक निजी अस्पताल में हुआ था।
बताया गया कि निजी अस्पताल के संचालक डॉक्टर दंपती महिला अस्पताल में ही कार्यरत हैं। इसका खुलासा होने पर अस्पताल के जिम्मेेदारों ने आशा व प्रसूता को डांट फटकारकर भगा दिया। मगर मंगलवार को वही आशा फिर से संबधित मरीज को भर्ती कराने पहुंच गई। ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स प्रियंका शुक्ला ने डायल 112 के जरिए पुलिस बुलाकर आशा कर्मचारी नीलम तिवारी को पकड़वा दिया। अस्पताल में कोई जिम्मेदार अधिकारी न होने से कोतवाली में लिखित शिकायत नहीं दर्ज कराई जा सकी। बताया गया कि बीते दिनों 18 प्रसूताओं को फर्जी तरीके से भर्ती कराए जाने के मामले सामने आ चुके हैं।
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इस तरह होता है खेल
महिला अस्पताल के एक कर्मचारी ने बताया कि सरकारी प्रोत्साहन राशि हड़पने का यह खेल पुराना है। आशा अस्पताल के डॉक्टर व कर्मचारियों से मिलीभगत कर भर्जी तरीके से प्रसूताओं का भर्ती करवा देती हैं। उन्हें आसानी से छह सौ रुपये कमीशन मिल जाता है, तथा प्रसूता को 1400 रुपये जननी सुरक्षा योजना का लाभ, पहला बच्चा होने पर प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत 5000 रुपये, बिटिया पैदा होने पर 25,000 कन्या सुमंगला योजना का लाभ तथा श्रमिक कार्ड होने पर 50,000 रुपये के बीमा का लाभ मिल जाता है। प्रसूता को मिलने वाले लाभ मेें आधी धनराशि आशा व भर्ती कराने में सहयोग करने वाली कर्मचारियों को देना पड़ता है।
थम नहीं रहा आशाओं का फर्जीवाड़ा
जिला महिला अस्पताल में पूरे दिन आशा कर्मचारियों का जमावड़ा रहता है। जैसे ही कोई गर्भवती अस्पताल में प्रवेश करती है, आशा तुरंत ही समझाने में लग जाती हैं। गर्भवती व उसके परिजनों को सरकारी अस्पताल में लापरवाही व गलत आपरेशन का भय दिखाकर निजी अस्पताल में भर्ती कराने का सुझाव देती हैं। जिससे उन्हें मोटा कमीशन मिलता है।
सरकारी प्रोत्साहन राशि को हड़पने के लिए महिला अस्पताल में फर्जी तरीके से प्रसूताओं को भर्ती कराने का मामला सामने आया है। संबंधित प्रकरण पर जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी। डॉ. अनिल मिश्र, अपर निदेशक चिकित्सा
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